Delhi News: दिल्ली के जंतर-मंतर में शिक्षा व्यवस्था में मौलिक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक अनोखा और तेजी से बढ़ता हुआ आंदोलन इन दिनों सुर्खियों में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा यह धरना शनिवार को लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। पिछले आठ दिनों से जारी इस आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है।
देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षा सुधार के पक्षधर और प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के रविवार, 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊर्जा दी है। माना जा रहा है कि रविवार को जंतर-मंतर पर देशभर से बड़ी तादाद में छात्र, अभिभावक और शिक्षा प्रेमी जुट सकते हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
कॉकरोच जनता पार्टी की मुख्य मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन किसी एक व्यक्तिगत मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि देश की करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर है। धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों की सरकार के खिलाफ नारेबाजी में मुख्य रूप से दो मांगें सामने आ रही हैं जो कि पहली मांग है केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पार्टी का मानना है कि वर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में नाकाम रहे हैं, इसलिए उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। दूसरी मांग है कि नीतिगत स्तर पर ऐसे बदलाव लाए जाएं जो छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करें और शिक्षा को व्यावसायिकता से मुक्त करें।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने धरना स्थल से एक वीडियो संदेश जारी कर इस बात की जानकारी दी कि आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां देश के एक प्रमुख वैज्ञानिक को भी अपनी जान जोखिम में डालना पड़ रहा है।
अभिजीत दीपके ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति को छात्रों के भविष्य के लिए अपनी सेहत और जीवन को दांव पर लगाकर अनशन करना पड़ रहा है, तो देश के आम नागरिकों का फर्ज बनता है कि वे अपने घरों से निकलकर इस आंदोलन का समर्थन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ही सरकार की नींद उड़ा सकती है और आंदोलन की आवाज को सत्ता के केंद्र तक मजबूती से पहुंचा सकती है।
छत्तीसगढ़ में युवा शक्ति का गुस्सा
जहां एक ओर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल की तैयारी चल रही है, वहीं धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ के एक छात्र का आमरण अनशन पूरे आंदोलन को भावनात्मक रूप से गर्म कर रहा है। पिछले दो दिनों से यह छात्र केवल जल ग्रहण करते हुए अनिश्चितकालीन अनशन पर डटा हुआ है।
इस छात्र का स्पष्ट कहना है कि उसका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ से प्रेरित नहीं है। उसकी एकमात्र मांग छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवाज को सरकार तक पहुंचाना है। उसने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती और उसकी मांगों पर विचार नहीं करती, तब तक वह अपना अनशन नहीं तोड़ेगा।
अभिजीत दीपके ने की अपील, छात्र ने दिया कड़ा जवाब
छात्र के गंभीर स्वास्थ्य को देखते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके स्वयं उससे मिलने पहुंचे। उन्होंने हाथ जोड़कर छात्र से अनशन खत्म करने की गुहार लगाई और आश्वासन दिया कि आंदोलन को आगे बढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी उनकी पार्टी और उनके साथी संभाल लेंगे। हालांकि, छात्र ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए नेता की अपील को ठुकरा दिया। यह घटना यह दर्शाती है कि देश के युवाओं में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितना गहरा गुस्सा और निराशा है।
रविवार का आंदोलन अहम दिन
कॉकरोच जनता पार्टी और धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं के लिए रविवार, 28 जून का दिन बेहद अहम है। सोनम वांगचुक के प्रस्तावित भूख हड़ताल में शामिल होने और छत्तीसगढ़ के छात्र के अनशन के चलते देशभर से छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी चल रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। संगठन का लक्ष्य किसी तरह की हिंसा करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार पर दबाव बनाना है।






















