NEET paper leak controversy in Jaipur: देशभर में चल रहे NEET पेपर लीक विवाद का घेरा अब राजनीतिक रूप से और तेज होता जा रहा है। लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस मामले में केंद्र सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर बनी हुई है। इसी क्रम में राजस्थान की राजधानी जयपुर में कांग्रेस ने बुधवार को एक बड़ा धरना और प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के विरोध में भी कांग्रेस का गुस्सा फूटा।
जयपुर की सड़कों पर उतरी कांग्रेस
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जनसैलाब उमड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में दर्जनों वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। नारेबाजी करते हुए ये जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा और बाद में सड़क पर धरने पर बैठ गया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पुतले का जलकर विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां और पोस्टर थे, जिनपर लिखा था कि “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा” और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”।
करीब सवा घंटे तक चला नाटक
जब कांग्रेस नेताओं ने सड़कों पर धरना शुरू किया, तो यातायात व्यवस्था चरमरा गई। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस घमासान के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। जयपुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले नेताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो पुलिस ने बल प्रयोग किए बिना अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा समेत 100 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में ले लिया। सभी को पुलिस वैन में बैठाकर अलग-अलग थानों में भेज दिया गया, जिससे मौके पर तनाव का माहौल थम गया।
पुलिस वैन में बैठने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में पेपर लीक कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि यह लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के सपनों पर डाका डालने जैसा है।
गहलोत ने कहा, “जब यह मामला सामने आया, तो सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए था। लेकिन केंद्र सरकार की चुप्पी ने छात्रों को सड़कों पर उतार दिया। सरकार के रवैये से छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता गया और आज यह देशव्यापी आंदोलन बन गया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र भूख हड़ताल पर थे, तब भी सरकार का कोई नुमाइंदा उनसे मिलने नहीं गया, जो अत्यंत शर्मनाक है।
क्यों जरूरी है धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा?
गहलोत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की मांग बिल्कुल तर्कसंगत है। जब पूरी परीक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाए और शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एजेंसियों (NTA) की किरकिरी हो, तो शिक्षा मंत्री को नैतिक दायित्व निभाते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ इस्तीफा ही नहीं, बल्कि इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच (जैसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच) होनी चाहिए, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
अशोक गहलोत ने दिल्ली में छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो छात्र अपने भविष्य की लड़ाई लड़ने लोकतांत्रिक तरीके से राजधानी पहुंचे थे, उन्हें लाठियों से भगाया गया। यह किसी भी लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आंदोलन को बल पर कुचलने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है।























