ईरान की आग और बाजार की राख: FPI ने 2 दिन में उड़ाए ₹20,000 Cr

ईरान युद्ध ने खराब किया विदेशी निवेशकों का मूड

US-Iran War Impact: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। तेल-गैस संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच विदेशी निवेशकों (FPI) का मूड पूरी तरह से खराब हो गया है। अप्रैल महीने की शुरुआत में ही FPI ने भारतीय बाजारों से ताबड़तोड़ पैसे निकालने शुरू कर दिए हैं।

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अप्रैल के महज दो कारोबारी दिनों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 19,837 करोड़ रुपये (लगभग 2.1 अरब डॉलर) की भारी निकासी की है।

मार्च में भी रहा था ‘ब्लडबाथ’

यह कोई अचानक हुआ है, ऐसा नहीं है। इससे पहले मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से इतिहास रचने वाली बिकवाली की थी। मार्च में FPI ने कुल 1.17 ट्रिलियन रुपये (लगभग 12.7 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी। अप्रैल में इस बिकवाली के जारी रहने से स्पष्ट है कि वैश्विक तनाव के कारण विदेशी पूंजी के लिए भारत अभी ‘सुरक्षित ठिकाना’ नहीं रहा है।

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17 महीनों बाद आई थी वापसी, फिर लौटी मार्च की बिकवाली

डिपॉजिटरी के आंकड़ों को देखें, तो विदेशी निवेशकों का पलायन सिलसिलेवार जारी है:

  • नवंबर 2025: 3,765 करोड़ रुपये निकाले
  • दिसंबर 2025: 22,611 करोड़ रुपये निकाले
  • जनवरी 2026: 35,962 करोड़ रुपये निकाले

लगातार तीन महीने की भारी निकासी के बाद, फरवरी 2026 में एक उम्मीद की किरण दिखी थी। FPI ने फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक था। लेकिन, मार्च में ईरान युद्ध की आग भड़कने से यह सारा आकर्षण धुंधला हो गया।

साल 2026: अब तक निकाले ₹1.5 लाख करोड़

अप्रैल के शुरुआती दो दिनों की निकासी को जोड़ लें, तो इस साल (2026) के पहले चार महीनों में ही FPI द्वारा भारतीय बाजारों से निकाली गई कुल रकम भयावह 1.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।

आखिर FPI क्यों भाग रहे हैं? (Expert View)

बाजार के जानकारों के अनुसार, विदेशी निवेशकों के पलायन के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:

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  1. ईरान युद्ध: मध्य पूर्व में जंग थमने का नाम नहीं ले रही है, जिससे ग्लोबल रिस्क अपेक्षा (Risk Appetite) काफी कम हो गई है।
  2. कच्चे तेल का आग: क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें लगातार $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह ‘फिस्कल डिफिसिट’ बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
  3. कमजोर रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार धड़ाम रहा है और हाल ही में यह 95 के भाव तक लुढ़क चुका है। कमजोर रुपया FPI के निवेश पर मुनाफे को कुचल रहा है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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