इंदौर में अहिल्या पथ योजना के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी

यह आंदोलन इन किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर है, जो लंबे समय से जमीनों पर लगाई गई पाबंदियों के कारण संकट में हैं। किसानों का कहना है कि जब तक योजना का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उनके हितों का संरक्षण होना चाहिए।

अहिल्या पथ योजना का विरोध तेज, किसानों ने अर्धनग्न प्रदर्शन किया

HIGHLIGHTS

  • जमीन खरीद-बिक्री पर रोक, किसानों का गुस्सा भड़क उठा
  • किसानों का आंदोलन नई ऊंचाइयों पर, सरकार से चेतावनी दी
  • अहिल्या पथ योजना के खिलाफ किसानों का जबरदस्त आंदोलन
  • किसानों का आंदोलन जारी, अंतिम निर्णय तक नहीं हटेंगे प्रतिबंध

शहर में अहिल्या पथ योजना के खिलाफ किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों ने अपने विरोध को जताने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख है दूसरे दिन भी आईडीए कार्यालय के बाहर अर्धनग्न प्रदर्शन।

यह आंदोलन इन किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर है, जो लंबे समय से जमीनों पर लगाई गई पाबंदियों के कारण संकट में हैं। किसानों का कहना है कि जब तक योजना का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उनके हितों का संरक्षण होना चाहिए।

अहिल्या पथ योजना का उद्देश्य और प्रभावित क्षेत्र

अहिल्या पथ योजना का उद्देश्य धार रोड से उज्जैन रोड होते हुए देवास रोड को जोड़ने का है, ताकि शहर का ट्रैफिक प्रवाह बेहतर हो सके। लेकिन इस परियोजना के चलते आठ गांवों की जमीनें प्रभावित हो रही हैं, जिनमें रिजलाय, जंबूड़ी हप्सी, पालाखेड़ी, बूढ़ानिया, बड़ा बांगड़दा, लिंबोदागारी, रेवती और बरदरी जैसे गांव शामिल हैं। इन गांवों की कुल मिलाकर लगभग 1400 हेक्टेयर जमीनें योजना के दायरे में आ रही हैं, जिन पर किसान गंभीर चिंता जता रहे हैं।

किसानों की मुख्य मांग और नाराजगी

किसानों का तर्क है कि अहिल्या पथ योजना का प्रस्ताव काफी समय से लंबित पड़ा है और अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। बावजूद इसके, जमीनों की खरीद-बिक्री, डायवर्जन और विकास कार्यों की अनुमति पर प्रतिबंध जारी है, जो किसानों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन रहा है।

उनका आरोप है कि जब योजना का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, तो जमीनों पर प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं? किसानों का कहना है कि इन प्रतिबंधों से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और वे अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पुरानी योजनाओं से भी किसान नाराज

किसानों ने आईडीए की पुरानी योजनाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इन गांवों में पहले से ही कई योजनाएं लागू हैं, और कुछ स्थानों पर प्राधिकरण ने जमीनों का कब्जा भी कर लिया है।

नियमों के मुताबिक, जमीन का विकास करने के बाद किसानों को तय हिस्सा वापस मिलना चाहिए था, लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया लंबित है, जिससे किसानों में असंतोष है। इन पुरानी योजनाओं का विवाद अभी हल नहीं हुआ है, जिससे किसानों का आक्रोश और बढ़ रहा है।

धरने और प्रदर्शन का स्वरूप

किसानों ने अपने विरोध को तेज करने के लिए अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया है, ताकि सरकार का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित किया जा सके। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए हैं, जिन्होंने अपने समर्थन में नारेबाजी की और अपने हक के लिए आवाज उठाई। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनके हितों में ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

अधिकारियों का आश्वासन और आगे की रणनीति

प्रदर्शन के दौरान आईडीए अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और उनकी मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, किसानों ने इस आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, और जब तक जमीनों पर लगी पाबंदियों को हटाने और अंतिम निर्णय लेने का कोई ठोस कदम नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसान चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान करे और जमीनों से प्रतिबंध हटाए जाएं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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