गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी, जो कि एक कुख्यात अपराधी और लेडी डॉन अनुराधा चौधरी के पति के रूप में भी जाने जाते हैं, का पुनः अपने घर पहुंचना सुर्खियों में है। हरियाणा के सोनीपत जिले के जठेड़ी गांव में 7 घंटे की कस्टडी पैरोल पर पहुंचकर उसने अपने जुड़वा बेटियों का नामकरण किया।
यह आयोजन खासतौर पर IVF तकनीक से जन्मी इन बच्चियों के नामकरण के लिए आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
कस्टडी पैरोल और सुरक्षा व्यवस्था
संदीप उर्फ काला जठेड़ी को द्वारका कोर्ट से 7 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली, जिसके बाद वह अपने घर पहुंचा। कोर्ट के आदेशानुसार, वह 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पुलिस कस्टडी में अपने घर रह सकेगा। इस दौरान उसके घर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके।
दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस को कोर्ट ने इस प्रक्रिया के लिए जरूरी इंतजाम करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि काला जठेड़ी को दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 30 से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित पाया गया है, जिनमें फिरौती, हत्या का प्रयास, रंगदारी और मर्डर जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। 2021 में उसे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था।
बच्चों का नामकरण कार्यक्रम और पारिवारिक समारोह
काला जठेड़ी ने मार्च 2024 में अनुराधा चौधरी से शादी की थी। यह शादी विशेष अनुमति से मिली कस्टडी पैरोल पर हुई थी। IVF तकनीक की मदद से जन्मी जुड़वा बेटियों का नामकरण कार्यक्रम उनके घर पर ही आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में परिवार के करीबी सदस्य और सुरक्षा बलों के अधिकारी भी मौजूद थे।
बेटियों का नामकरण हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार हवन, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच किया गया। इस समारोह का आयोजन सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही सावधानीपूर्वक किया गया था। जैसे ही नामकरण का आयोजन संपन्न हुआ, भारी संख्या में पुलिस बल को वापस ले जाया गया।
पिछले पैरोल अनुभव और कानूनी प्रक्रिया
संदीप जठेड़ी पहले भी पैरोल पर बाहर निकला है। मार्च 2024 में उसकी शादी के लिए उसे फिर से पैरोल मिली थी। उस समय वह दिल्ली की एक अदालत द्वारा सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक की अनुमति मिली थी।
जुलाई 2024 में भी वह अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए सोनीपत पहुंचा था, जहां पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे कस्टडी पैरोल दी थी। इन घटनाओं से पता चलता है कि वह अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए बार-बार कोर्ट से अनुमति लेता रहा है।
सुरक्षा और कानूनी चुनौतियां
काला जठेड़ी का यह फिर से घर पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती रहा है। इस दौरान दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने मिलकर भारी सुरक्षा व्यवस्था की। विशेष ध्यान दिया गया कि कोई अप्रिय घटना न हो और अपराधी के परिवार को उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिले। इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अपराधी यदि किसी भी तरीके से अपने परिवार से जुड़ाव बनाए रखें, तो इससे निपटना अधिक कठिन हो जाता है।


























