Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में लागू किए गए एंट्री टैक्स के खिलाफ निहंग सिख संगठनों का विरोध तेज हो गया है। इस विवाद ने न केवल राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है, बल्कि ट्रांसपोर्टर्स, व्यापारी और आम जनता के बीच भी चिंता की लहर दौड़ गई है। बुधवार से शुरू हुए इस विरोध के तहत निहंग संगठनों ने कुल्लू-मनाली हाईवे पर कीरतपुर साहिब में मोड़ा टोल प्लाजा के निकट हिमाचल प्रदेश से आने वाले वाहनों से खालसा राज टैक्स के नाम पर स्वैच्छिक राशि वसूलना शुरू कर दिया है। इस अभियान का नेतृत्व निहंग संगठन तरना दल कर रहा है, जिसने इस कदम को हिमाचल प्रदेश सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करने का माध्यम बताया है।
Himachal Pradesh News: निहंग संगठनों का तर्क और विरोध का कारण
तरना दल के निहंग अच्छर सिंह ने कहा कि उनका यह कदम पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी भी वाहन चालक से जबरदस्ती नहीं की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए एंट्री टैक्स का विरोध है, जो उन्हें अस्वीकार्य प्रतीत हो रहा है। सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स की तुलना में, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से जो टैक्स वसूला जाता है, उससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि NHAI रोड बनाने के लिए टैक्स लेती है, जोकि सड़क निर्माण का एक उचित माध्यम है।

वहीं, उन्होंने हिमाचल सरकार पर आरोप लगाया कि वह गुंडा टैक्स वसूल रही है, जो पूरी तरह से अवैध है। निहंग सिंहों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी इस स्वैच्छिक पहल को रोकने की कोशिश की, तो इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल विरोध व्यक्त करने का तरीका है, बल्कि यह सरकार को यह संदेश देने का भी प्रयास है कि वर्तमान टैक्स नीति लोगों के हित में नहीं है और इससे व्यापार और यात्रा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
Himachal Pradesh News: वाहनों से स्वैच्छिक दान और विरोध का स्वरूप
निहंग सिंहों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी भी वाहन चालक को परेशान करना नहीं है। वह किसी पर दबाव डालने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो भी वाहन चालक अपनी श्रद्धा और इच्छा से इस पहल में योगदान देना चाहता है, वह अपनी श्रद्धा के अनुसार राशि दे सकता है। वहीं, जो योगदान नहीं देना चाहता, उसे बिना किसी रोक-टोक जाने दिया जाएगा।
यह अभियान हिमाचल प्रदेश सरकार को यह संदेश देने के लिए शुरू किया गया है कि जब तक सरकार अपने एंट्री टैक्स को समाप्त नहीं करती, तब तक निहंग जत्थेबंदियां अपने विरोध को जारी रखेंगी। उनका मानना है कि यह कदम व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम जनता पर पड़े आर्थिक बोझ को कम करने के साथ-साथ सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ एक आवाज है।

Himachal Pradesh News: सरकार और पुलिस की स्थिति
इस विरोध के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राहुल शर्मा ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स का इतिहास और विवाद
हिमाचल प्रदेश में वर्षों से वाहनों से एंट्री टैक्स वसूला जाता रहा है, जो कि एक परंपरागत व्यवस्था है। 2025 में, हिमाचल सरकार ने इन टैक्स की दरों में मामूली वृद्धि की थी। इसके बाद, फरवरी 2026 में सरकार ने नई टोल नीति लागू करते हुए कई श्रेणियों के वाहनों पर भारी बढ़ोतरी का फैसला किया। इसमें एंट्री टैक्स में भारी इजाफा किया गया था, जिससे बड़े ट्रांसपोर्टर, व्यापारी और वाहन चालक नाराज हो गए थे।
सरकार के इस कदम का सबसे अधिक विरोध पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में देखने को मिला, जहां हिमाचल में अधिक टूरिस्ट और ट्रांसपोर्टर्स आते-जाते हैं। विरोध के चलते, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को 31 मार्च 2026 को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने इस दौरान, निजी कारों और कुछ यात्री वाहनों पर प्रस्तावित बढ़ोतरी को वापस लेने का ऐलान किया। वर्तमान में, कार, जीप, वैन से 100 रुपये, 6-12 सीटों वाले वाहन से 130 रुपये, ट्रैक्टर से 100 रुपये और भारी वाहनों से 800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।






















