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आधे घंटे की बारिश ने खोली बिहार सरकार की पोल

Bihar News: हर साल बारिश के मौसम से पहले नगर निगम नालियों की सफाई का ढिंढोरा पीटता है। लाखों रुपये इसके लिए खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब बादल फटते हैं, तो सच्चाई सामने आ जाती है। दरभंगा में भी यही हुआ।

बारिश की पहली मार में फेल हुआ दरभंगा का ड्रेनेज सिस्टम

HIGHLIGHTS

  • जलजमाव से थमा दरभंगा
  • पहली बारिश में फेल व्यवस्था
  • सड़कों पर पानी, लोग परेशान
  • नगर निगम के दावे ध्वस्त
  • बारिश बनी शहर की मुसीबत

Bihar News: बिहार के दरभंगा में मानसून से पहले हुई महज आधे घंटे की भरी बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन की तमाम दावों की पोल खोल कर रख दिया है। जहां विकास की बातें की जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक छोटी सी बारिश शहर को ‘पानी-पानी’ कर देती है। बारिश के बाद शहर के तमाम हिस्सों में इतना जलजमाव हुआ कि लोगों को अपने घरों से निकलना दूभर हो गया। स्थिति यह हो गई कि सड़कें नाले और नाले सड़कों का रूप ले लिए है।

बिहार के दरभंगा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि बारिश का सबसे बुरा असर उस जगह पर दिखा, जहां से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। उस शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) का हाल सबसे खराब दिखा, अस्पताल का पूरा परिसर पानी से लबालब हो गया। खासकर मेडिसिन विभाग के आसपास का हाल तो देखते ही बनता था। मरीजों के लिए अस्पताल पहुंचना एक चुनौती बन गया। घुटनों तक पानी भरने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

डीएमसीएच परिसर में मरीजों का दर्द और प्रशासन की उदासीनता

अस्पताल परिसर में फंसे मरीजों के परिजनों का गुस्सा और हताशा साफ देखी जा सकती थी। एक मरीज के परिजन जगदीश शर्मा ने अपना दर्द बयान करते हुए बताया कि अस्पताल के अंदर इतना पानी भर गया है कि आने-जाने का कोई रास्ता नहीं बचा है और कहा कि मरीज को किसी तरह खींचकर अस्पताल तक लाना पड़ रहा है। पूरा कपड़ा भीग चुका है और हम मजबूरी में गंदे पानी से होकर गुजर रहे हैं। यह कोई पहली बार नहीं है, हर साल यही हाल होता है, जो कि भाजपा सरकार आने के बाद भी यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

वहीं, दूसरे मरीज के परिजन मोहम्मद अजीज ने प्रशासन की नींद पर सवाल उठाते हुए कहा कि डीएमसीएच जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में जलजमाव होना बेहद चिंताजनक है। घुटनों तक पानी भरा है। दवा लेने और जांच के लिए बाहर जाने में काफी दिक्कत हो रही है। अस्पताल में बड़ी-बड़ी इमारतें बना दी गई हैं, शानदार वार्ड बन गए हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की स्थिति दयनीय है। बारिश हुई नहीं कि अस्पताल तालाब में तब्दील हो गया है।

लोगों ने आशंका जताई है कि अस्पताल परिसर में इतना पानी भरे रहने से किसी भी वक्त कोई बड़ा हादसा हो सकता है। स्लिपरी फर्श और गहरा पानी किसी को गिरने से भारी चोट पहुंचा सकता है। इसके अलावा गंदे पानी में कई तरह की बीमारियां फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। साथ ही, पानी में सांप, बिच्छू या अन्य जहरीले कीड़े-मकोड़े होने का भी लोगों को डर सता रहा है, जो मरीजों के लिए और भी खतरनाक है।

बादल फटते नगर निगम की लापरवाही सामने

हर साल बारिश के मौसम से पहले नगर निगम नालियों की सफाई का ढिंढोरा पीटता है। लाखों रुपये इसके लिए खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब बादल फटते हैं, तो सच्चाई सामने आ जाती है। दरभंगा में भी यही हुआ। सफाई अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आया। नालों की समय पर सफाई नहीं होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ा। मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक पानी भर गया। कई जगह तो पानी का स्तर इतना ऊंचा था कि सड़क और नाले में फर्क करना मुश्किल हो गया था। वाहनों का पहिया डूब जाने से आवाजाही पूरी तरह ठप्प हो गई।

खुली नालियों का खतरा और लोगों का आक्रोष

स्थानीय निवासी विपुल सिंह ने इस पूरी घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सड़क पर हुए जलजमाव ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। उन्होंने नगर निगम से सभी नालों की सफाई कराने और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की। विपुल का कहना है कि अगर समय रहते नालों की गहराई नहीं बढ़ाई गई और सफाई नहीं की गई, तो ऐसी स्थिति हर बार बनेगी। सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जिसका नतीजा सामने है।

वहीं, दूसरे स्थानीय निवासी दिलीप कुमार ने एक और बड़ी खतरे की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि जिला स्कूल के पास मुख्य सड़क पर काफी पानी जमा हो गया है। पानी का लेवल इतना बढ़ गया है कि नाले के ढक्कन तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। दिलीप कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अगर कोई वाहन या पैदल व्यक्ति खुले नाले में गिर पड़े, तो उसकी जान भी जा सकती है। प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

सवालिया निशान और भविष्य की चुनौतियां

बारिश के बाद शहर में बने हालात ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दरभंगा की नागरिक व्यवस्था बारिश का सामना करने के लिए तैयार नहीं है। हर साल लोगों को इसी परेशानी से जूझना पड़ता है। अब लोगों की नजरें मानसून से पहले नगर निगम और प्रशासन के उन कदमों पर टिकी हैं, जो वे इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उठाएंगे।

शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। जलजमाव की समस्या का मूल कारण ढूंढा जाए और उसे दूर किया जाए। ड्रेनेज सिस्टम का पुराना होना और अतिक्रमण भी इसका एक प्रमुख कारण माना जाता है, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या अगली बारिश तक प्रशासन अपनी कमर कस लेता है या फिर दरभंगा के लोगों को यह गंदगी और जलजमाव का दंश झेलना पड़ता रहेगा। फिलहाल, आधे घंटे की बारिश ने जिस तरह से व्यवस्था की पोल खोली है, वह किसी भी सूची-बद्ध स्मार्ट सिटी के लिए कलंक है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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