उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित सबसे बड़े रेफरल अस्पताल (बेस अस्पताल) की इमरजेंसी वार्ड को एक बार फिर रणभूमि के रूप में देखना पड़ा। चिकित्सा सुविधाओं और जान बचाने के लिए बने इस संवेदनशील क्षेत्र में बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने इलाज के लिए आए एक घायल युवक के साथी पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। इस पूरी घटना का जिक्र जब सामने आया, तो न सिर्फ अस्पताल प्रशासन बल्कि पुलिस व्यवस्था की भी कलई खुल गई।
ठंडी सड़क का विवाद अस्पताल तक पहुंचा
मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला हल्द्वानी के घनी आबादी वाले क्षेत्र ठंडी सड़क (Thandi Road) से जुड़ा हुआ है। यहां कुछ लोगों के बीच पुरानी रंजिश और किसी बात को लेकर जमकर मारपीट हुई, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को तत्काल इलाज के लिए हल्द्वानी के बेस अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। उसके साथ उसका एक साथी भी मौजूद था, जिसका नाम अनुज कुमार बताया जा रहा है।
लेकिन क्या कोई सोच सकता था कि सड़क पर शुरू हुई यह लड़ाई इमरजेंसी वार्ड तक अपना पंजा पसार लेगी? रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे ही घायल युवक अस्पताल पहुंचा, उसके पीछे-पीछे आरोपी गुट भी वहां पहुंच गया। इमरजेंसी के अंदर ही आरोपियों ने अनुज कुमार पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई दहशत
इस हमले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह पूरी वारदात अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में साफ-साफ कैद हो गई है। वायरल हो रहे इस फुटेज को देखकर आपसे रूबरू होते हैं कि किस तरह से अस्पताल जैसे सेंसिटिव जोन में अचानक हड़कंप मच गया। जैसे ही हमलावरों ने धारदार हथियार निकाला, वहां मौजूद डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और अन्य मरीजों के तीमारदारों में भयंकर भगदड़ मच गई।
लोग जान बचाने के लिए यहां-वहां भागने लगे। इमरजेंसी वार्ड में इलाज करा रहे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों की स्थिति बहुत खराब हो गई। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अस्पताल के अंदर कैसे लोग तलवार या चाकू लेकर घुस गए। इस घटना ने आम नागरिकों के मन में अस्पताल की सुरक्षा को लेकर गहरा डर और निराशा पैदा कर दी है।
पुलिस पहुंची मौके पर, जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही तत्काल हल्द्वानी पुलिस को अलर्ट कर दिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्काल इमरजेंसी वार्ड को खाली करवाया और भीड़ को नियंत्रित किया। अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) और सीओ सिटी हल्द्वानी अमित कुमार सेनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचकर जायजा लिया।
सीओ सिटी अमित कुमार सैनी ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके के सभी सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। वायरल वीडियो और कैमरों में कैद चेहरों की मदद से आरोपियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी पीड़ित पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर तहरीर प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन जैसे ही तहरीर आएगी, तुरंत मुकदमा दर्ज करके आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जाएगी।
बेस अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली
यह कोई पहला मौका नहीं जब हल्द्वानी के बेस अस्पताल में गुंडागर्दी हुई हो। हालांकि, इमरजेंसी वार्ड के अंदर धारदार हथियार लेकर घुसना चिकित्सा व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी की घंटी है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के मुख्य द्वारों पर सुरक्षा गार्ड कहां थे? क्या अस्पताल में कोई मेटल डिटेक्टर (धातु का पता लगाने वाली मशीन) लगा है? बिना किसी चेकिंग के कैसे कोई भी व्यक्ति इमरजेंसी वार्ड तक धारदार हथियार लेकर पहुंच गया?

आम नागरिकों और अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति इलाज के लिए अस्पताल आता है, तो उसे सुरक्षित माहौल मिलना उसका बुनियादी अधिकार है। लेकिन अगर डॉक्टर और स्टाफ खुद सुरक्षित नहीं हैं, तो वे मरीजों का इलाज कैसे करेंगे?
मामले की जांच जारी है और पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया है। लेकिन अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग और अस्पताल प्रशासन पर आती है। भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए अब बेस अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ओवरहाल (Overhaul) करने की जरूरत है। इमरजेंसी गेट्स पर बाउंसर्स की तैनाती, सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार और एंट्री प्वाइंट्स पर सख्त चेकिंग लागू किए जाने की मांग अब तेज हो चुकी है।
























