Noida News: गुरु पूर्णिमा का त्योहार भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो गुरुजनों का सम्मान एवं श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व पूरे देश में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसमें श्रद्धालु अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए, महर्षि नगर, नोएडा में भी इस पावन पर्व को विशेष धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया गया।
महर्षि नगर में गुरु पूर्णिमा का आयोजन
महर्षि नगर के उत्सव भवन में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और संस्कारों का संचार करना था। इस अवसर पर वैदिक पंडितों ने विशेष पूजा, रुद्धाभिषेक और अनुष्ठान किए, जिनमें भगवान विष्णु एवं भगवान शिव सहित अन्य देवों की पूजा की गई। इन कर्मकांडों में शामिल विधियों का उद्देश्य मनोकामनाओं की पूर्ति और आत्मा में शांति का संचार था।
मुख्य अतिथि के रूप में महर्षि यूनिवर्सिटी के डीजीओपी शर्मा उपस्थित थे, जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें अपने गुरुओं का सम्मान और उनसे सीखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु का स्थान भगवान के समान माना जाता है, क्योंकि गुरु ही हमारे जीवन का मार्गदर्शक होता है। इस आयोजन में कुल 51 वैदिक पंडितों ने भाग लिया और श्रद्धालुओं के बीच भव्य पूजा एवं अनुष्ठान सम्पन्न किया।
श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य
शाम को आयोजित भव्य कथा एवं भजन संध्या ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भगवान के सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति के रंग में डूब गए। इस दौरान भव्य भड़ारा भी किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया और जीवन में सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लिया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गुरु पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर, महर्षि वेद विज्ञानं विद्या पीठ के अधिकारियों ने उत्सव भवन एवं मंडप में कुल 500 पौधे लगाए। यह वृक्षारोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि समाज में हरित वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का भी संकल्प है। पौधे लगाकर युवाओं और समाज के सदस्यों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया, ताकि हमारे समाज में हरियाली और स्वच्छता का महत्व समझा जा सके।
आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेश
यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर था, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी था। महर्षि नगर के लोगों ने इस पर्व को अपने जीवन में अपनाते हुए, प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन में सद्गुणों और नैतिक मूल्यों को स्थान देने का संकल्प लिया।






















