Noida News: नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि पर निर्मित स्कूलों और अस्पतालों में किसानों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को मिलने वाली छूट की जानकारी डिस्प्ले बोर्ड पर न होना अब विवाद का विषय बन गया है। ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नोएडा प्राधिकरण के सैक्टर-96 स्थित प्रशासनिक कार्यालय में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) वंदना त्रिपाठी से मुलाकात कर इस मुद्दे पर गंभीर आपत्ति दर्ज की।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान ने एसीईओ वंदना त्रिपाठी को अवगत कराया कि वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री सचिवालय से एक पत्र जारी हुआ था। इस पत्र में नोएडा प्राधिकरण को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले सभी स्कूलों और अस्पतालों के गेट पर 10×15 आकार के डिस्प्ले बोर्ड लगवाए जाएं, जिन पर लीज डीड की शर्तों के अनुसार ग्रामीणों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का उल्लेख हो।
2015 का आदेश, दस साल बाद भी नहीं हुआ क्रियान्वयन
संगठन के अनुसार, इस मुद्दे पर 25 जुलाई 2015 को नोएडा प्राधिकरण में बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें निर्णय लिया गया कि लीज डीड की शर्तों के अनुसार कमजोर वर्ग एवं अन्य उल्लेखित वर्गों को दी जाने वाली सभी सुविधाएं लिखते हुए डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं। संबंधित परियोजना अभियंताओं द्वारा स्कूलों और अस्पतालों को सूचित भी किया गया था। लेकिन वर्ष 2015 से अब तक, यानी लगभग एक दशक बीत जाने के बाद भी एक भी संस्थान में यह बोर्ड नहीं लगाया गया है।
किसानों और EWS वर्ग पर क्या असर पड़ रहा है?
ग्राम विकास संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने एसीईओ को बताया कि क्षेत्र के किसान जब इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाते हैं, तो उन्हें छूट नहीं मिल पाती। इसका मुख्य कारण यह है कि अस्पतालों के बाहर छूट संबंधी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इसी तरह, नोएडा प्राधिकरण की आवंटित भूमि पर बने 157 स्कूलों में किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों का दाखिला नहीं हो पा रहा है।
अशोक चौहान ने कहा कि जानकारी के अभाव में किसानों एवं EWS वर्ग के लोगों का शोषण लगातार हो रहा है। लीज डीड में जो अधिकार उन्हें प्राप्त हैं, उनसे वे वंचित रह जा रहे हैं।
संगठन ने रखीं ये मुख्य मांगें
ग्राम विकास संगठन नोएडा ने नोएडा प्राधिकरण से निम्नलिखित मांगें रखीं:
- नोटिस जारी किए जाएं: नोएडा प्राधिकरण द्वारा भूमि आवंटित सभी 157 स्कूलों को नोटिस जारी किया जाए।
- डिस्प्ले बोर्ड लगवाए जाएं: प्रत्येक स्कूल और अस्पताल के गेट पर 10×15 के बोर्ड पर छूट एवं आरक्षण संबंधी जानकारी अंकित कराई जाए।
- EWS दाखिला सुनिश्चित हो: लीज डीड की शर्तों के अनुपालन में किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जाए।
- निजी अस्पतालों में छूट की पारदर्शिता हो: किसानों को इलाज में मिलने वाली छूट की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।
एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने दिया शीघ्र समाधान का आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बाद नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने इस मामले के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है। संगठन को उम्मीद है कि प्राधिकरण जल्द ही 157 स्कूलों को नोटिस जारी करेगा और डिस्प्ले बोर्ड लगाने की कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में कौन रहा शामिल?
इस अवसर पर ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान, सतेन्द्र गुर्जर सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। संगठन ने कहा है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
























