ऋषी तिवारी
इस्कॉन नोएडा में मंगलवार को गौर पूर्णिमा महोत्सव बड़े हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। श्री चैतन्य महाप्रभु के आविर्भाव दिवस पर संपूर्ण मंदिर परिसर को विविध पुष्पों एवं आकर्षक सज्जा से सुसज्जित किया गया, जबकि भगवान का मनोहर पुष्प-श्रृंगार श्रद्धालुओं का केंद्र आकर्षण बना।
मंगल दर्शन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 4:30 बजे भगवान के मंगल दर्शन से हुआ। इसके बाद प्रातः 8:00 बजे परमपूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज, जो श्रील प्रभुपाद के निजी शिष्य एवं इस्कॉन के वरिष्ठ आचार्य हैं, ने गौर कथा पर विशेष प्रवचन दिया।
धर्म की पुनर्स्थापना का संदेश
अपने प्रवचन के दौरान लोकनाथ स्वामी महाराज ने कहा कि लगभग 540 वर्ष पूर्व, जब कलियुग में अधर्म की वृद्धि हो रही थी और धार्मिक आचरण मात्र औपचारिकता बनकर रह गया था, तब स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतार लेकर हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से वास्तविक धर्म, प्रेम और भक्ति की पुनर्स्थापना की। उन्होंने चैतन्य महाप्रभु की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को उनके उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।
भगवान का पंचगव्य महाभिषेक
सायं 7:00 बजे भगवान का पंचगव्य महाभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान गाय के दूध, दही, घी, शहद, ताजे फलों के रस एवं नारियल जल आदि से भगवान का अभिषेक किया गया। इसके उपरांत भगवान की महाआरती सम्पन्न हुई।
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विशिष्ट अतिथियों ने लिया हिस्सा
इस उत्सव में इस्कॉन मेल्बोर्न (ऑस्ट्रेलिया) के अध्यक्ष श्रीमान अनिरुद्ध प्रभुजी भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रभुजी ने श्रद्धालुओं से हरिनाम के जप को अपने जीवन में स्वीकार करने का आग्रह किया। उत्सव के दौरान भक्तगण एक-दूसरे को गले मिलकर होली एवं गौर पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते रहे।
महाप्रसाद का वितरण
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने भगवान को अर्पित भोग को महाप्रसाद के रूप में ग्रहण किया तथा मंदिर परिसर में ही रात्रि प्रसाद का आनंद लिया। इस प्रकार गौर पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति-भाव के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।




















