Delhi News : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी (LPG) की भारी कमी ने रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड कारोबार को गहरे संकट में डाल दिया है। गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण कारोबारियों का जीवन पटरी से उतर गया है। शहर के कई हिस्सों में रेस्टोरेंट मालिकों को काम के घंटे घटाने, मेन्यू सीमित करने और यहां तक कि अपने आउटलेट बंद करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
कमाई में भारी गिरावट, घटा मेन्यू
स्थिति इतनी गंभीर है कि कारोबारियों के लिए रोजमर्रा का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। ‘तड़का रानी’ रेस्टोरेंट चेन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि पहले जहां उनकी रोजाना करीब 3 लाख रुपये की बिलिंग होती थी, वह अब घटकर महज 25 से 30 हजार रुपये रह गई है। उन्होंने कहा, “हम अपने मेन्यू का केवल 20 फीसदी हिस्सा ही ग्राहकों को दे पा रहे हैं। खाना भी सीमित मात्रा में तैयार किया जा रहा है।”
ऑपरेशन चलाना भी हुआ चुनौती
रेस्टोरेंट संचालकों के सामने सिर्फ गैस की कमी ही नहीं, बल्कि परिचालन (ऑपरेशन) चलाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। गैस के अभाव में बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने पर वे जल्दी गर्म हो रहे हैं और खराब हो रहे हैं। शुरुआत में तो कई जगहों पर आउटलेट पूरी तरह बंद करने पड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार जरूर आया है, लेकिन नुकसान लगातार बढ़ रहा है और जल्द किसी राहत के आसार नजर नहीं आ रहे।
सप्लाई में रुकावट का कारण?
कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में यह रुकावट वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में जारी संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच आई है। सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के प्राथमिकता आवंटन में बदलाव किया है, जिसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ा है। शाहदरा के एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया, “अब पूरी क्षमता के साथ काम करना संभव नहीं रहा।”
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छोटे विक्रेताओं पर सबसे ज्यादा असर
इस संकट का सबसे बुरा असर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों और छोटे विक्रेताओं पर पड़ा है। दक्षिणी दिल्ली के चाय विक्रेता इकबाल ने बताया, “ज्यादातर दिन ठेला बंद रखना पड़ता है। आमदनी नहीं होने से रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।” पूर्वी दिल्ली के एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि इस हफ्ते वे महज दो दिन ही काम कर पाए।
नवरात्रि को लेकर बढ़ी चिंता
त्योहारी सीजन में नवरात्रि के दौरान ग्राहकों की संख्या घटने की आशंका ने कारोबारियों की सूरत और बिगाड़ दी है। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने कहा, “स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन बाधाएं अभी भी मौजूद हैं। कई रेस्टोरेंट सिर्फ उन्हीं दिनों खुल पा रहे हैं जब उन्हें सिलेंडर मिल जाता है, बाकी दिन वे बंद रहते हैं।”
ब्लैक मार्केट का खतरा और रोजगार संकट
जरूरतमंद लोग ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर घरेलू सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं। इंडियन वर्कर्स अलायंस के संदीप ने बताया, “मजदूरों और छोटे विक्रेताओं के सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पाबंदियों और जुर्माने के डर के बीच लोग खुलकर काम भी नहीं कर पा रहे हैं।” वर्तमान में दिल्ली का फूड सेक्टर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है और कारोबारियों को जल्द से जल्द राहत की उम्मीद है।






















