Iran-US Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खुले युद्ध की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा भेजे गए नए प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इस अस्वीकृति के बाद दोनों देशों की तरफ से धमकियों का दौर शुरू हो गया है और पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है।
ईरान के प्रस्ताव के तीन मुख्य अंग थे— होर्मुज, न्यूक्लियर और नाकाबंदी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इन शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया है।
क्या था ईरान का प्रस्ताव और ट्रंप का क्या रुख?
- होर्मुज की नाकाबंदी: ईरान ने साफ कहा कि पहले अमेरिका को होर्मुज जलडमरू में से नाकाबंदी हटानी होगी, उसके बाद ही कोई बातचीत होगी। ट्रंप का जवाब था- “अमेरिका ईरान की शर्तों पर झुकने वाला नहीं है।”
- न्यूक्लियर डील: ईरान ने होर्मुज खुलने के बाद ही परमाणु कार्यक्रम पर बात करने की बात कही। जवाब में ट्रंप ने सख्त लहजा अपनाते हुए कहा, “हम किसी पागल के हाथ में परमाणु बम नहीं आने दे सकते।”
- मिसाइल प्रोग्राम: ईरान ने अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया।
- सुरक्षा गारंटी: ईरान ने अमेरिका से प्रतिबंध हटाने और हमला न करने की लिखित गारंटी की मांग उठाई।
ट्रंप ने साफ कर दिया कि ईरान के इस नए प्रस्ताव से कोई समझौता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ दो विकल्प बचे हैं- या तो ईरान पर हमला करके उसे बर्बाद कर दिया जाए, या फिर अमेरिका उसकी शर्तों पर समझौता कर ले (जो कि नामुमकिन है)।
ईरान की ‘अंतिम चेतावनी’ और खाड़ी देशों को खतरा
ट्रंप के बयान के बाद ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व और सेना ने पलटवार किया है:
- ईरानी सेना के उप प्रमुख मोहम्मद जाफर असदी ने कहा कि अमेरिका समझौते के लिए ईमानदार नहीं है। अगर अमेरिका ने कोई भी मूर्खता की, तो ईरानी सेना करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- सुप्रीम काउंसिल के सदस्य हसन रहिमपुर अजगादी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए खाड़ी देशों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर ईरान पर हमला हुआ, तो हम अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में घुसकर अटैक करेंगे। खाड़ी शासकों के महलों को तबाह कर दिया जाएगा।”
- सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका को आर्थिक रूप से बर्बाद करने की चेतावनी दी और ईरानी जनता से अमेरिकी आर्थिक नाकाबंदी को नाकाम करने की अपील की।
अमेरिकी सेना की बड़ी रणनीतिक तैयारी
महज धमकियों तक सीमित नहीं, बल्कि अमेरिका ने सैन्य स्तर पर भी बड़ी तैयारी कर ली है। वॉर रूम की मीटिंग के बाद अमेरिकी सेना ने तेजी दिखाई है:
- USS बॉक्सर: अमेरिका ने अपनी एडवांस्ड एम्फीबियस शिप ‘USS बॉक्सर’ को ईरान की तरफ रवाना कर दिया है। यह जहाज मलक्का जलडमरू से होकर हिंद महासागर में प्रवेश कर चुका है। इस पर 2500 मरीन सैनिक तैनात हैं और यह सबसे एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर जेट **F-35 लाइटनिंग-2** से लैस है।
- B-1 बॉम्बर: यूके के रैफ फेयरफोर्ड बेस से अमेरिकी सुपरसोनिक B-1 बॉम्बर की उड़ान ईरान की तरफ ट्रेस की गई है। खास बात यह है कि ये बॉम्बर ‘आफ्टरबर्नर’ (कॉम्बैट मोड) के साथ उड़ रहा है, जो युद्ध की तैयारी का संकेत है।
- 50,000 सैनिक: फिलहाल पश्चिमी एशिया में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं और दो एयरक्राफ्ट कैरियर खाड़ी में तैनात हैं। यह दशकों का सबसे बड़ा सैन्य डिप्लॉयमेंट माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरू: ‘ईरान का परमाणु बम’
इस पूरे टकराव का सबसे अहम केंद्र ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ है।
- ईरान ने साफ कहा है कि होर्मुज अब पहले जैसा नहीं रहेगा और यह उसका अधिकार क्षेत्र है। ईरान ने इसे अपना “परमाणु बम” करार दिया है।
- वहीं, अमेरिका ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है कि कोई भी देश ईरान को होर्मुज में ‘टोल टैक्स’ न दे। अमेरिका का कहना है कि जो देश ईरान को टोल देगा, वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ जाएगा और उस पर भारी भरकम टैक्स लगाया जाएगा।






















