दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुए हमले और विमान के अचानक नीचे आने की घटना ने यात्रियों को दहशत में डाल दिया। इस संकट के बीच भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार, यात्रियों और विमान में यात्री बनकर सफर कर रहे दो अतिरिक्त पायलटों ने हालात संभालने में अहम भूमिका निभाई। विमान अंततः सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा।
घटना के बारे में सामने आई यात्री की गवाही के मुताबिक, कॉकपिट में संघर्ष के दौरान कैप्टन ने दरवाजा खोला और यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को बाहर खींचकर काबू में किया। उसी दौरान विमान में मौजूद एक पायलट कॉकपिट तक पहुंचा। थोड़ी देर बाद दूसरा पायलट भी वहां आया। दोनों ने कॉकपिट का दरवाजा बंद किया और विमान को सुरक्षित उतारने की जिम्मेदारी संभाली।

हालांकि, यात्रियों के लिए यह राहत का क्षण तुरंत भरोसे में नहीं बदला। कॉकपिट का दरवाजा बंद होने और कोई घोषणा न होने से केबिन में बैठे कुछ लोगों को चिंता हुई कि विमान को आखिर कौन उड़ा रहा है और उसे कहां ले जाया जाएगा।
फ्लाईदुबई की उड़ान में क्या हुआ था?
फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और यात्रियों के बयान के अनुसार, उड़ान के दौरान ओमानी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। इस दौरान विमान तेजी से नीचे आया और यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। रिपोर्टों में विमान के लगभग 17,000 फीट नीचे आने का उल्लेख किया गया है।
कॉकपिट में हुआ संघर्ष बेहद गंभीर था। कैप्टन मच्छार ने किसी तरह दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को बाहर खींचकर काबू में करने में मदद की। इस बीच विमान का नियंत्रण संभालना जरूरी था। विमान में मौजूद दो अन्य पायलट आगे आए और कॉकपिट में प्रवेश किया।

दूसरी पंक्ति में बैठे इजरायली यात्री डैनियल श्लिचटर ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को घटना का विवरण दिया। उनके मुताबिक, यात्रियों की भीड़ हमलावर को काबू करने में लगी थी। इसी दौरान एक पायलट भीड़ के ऊपर से छलांग लगाकर कॉकपिट के कंट्रोल पैनल तक पहुंचा। उसका साथी भी जल्द ही कॉकपिट में आ गया। दोनों ने दरवाजा बंद करके विमान को संभालने की कोशिश शुरू की।
यात्रियों के लिए राहत के साथ नई चिंता
कॉकपिट में दो नए पायलटों के पहुंचने से विमान को उड़ाते रहने की उम्मीद जगी, लेकिन केबिन में बैठे यात्रियों को तुरंत यह पता नहीं था कि आगे क्या होने वाला है। दरवाजा बंद हो गया था और कुछ समय तक कॉकपिट से कोई घोषणा नहीं हुई।
श्लिचटर के अनुसार, यात्रियों के मन में यह आशंका भी आई कि कहीं विमान को किसी दूसरी दिशा में न ले जाया जा रहा हो। विमान उस क्षेत्र के करीब था, इसलिए कुछ यात्रियों को डर था कि उसे ईरान या किसी अनजान जगह ले जाया जा सकता है। यह डर उस समय और बढ़ गया जब कॉकपिट से तुरंत कोई संदेश नहीं आया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विमान के पिछले हिस्से और रडर को नुकसान पहुंचा था। ऐसे में उसे स्थिर करना और सुरक्षित दिशा में ले जाना आसान नहीं था। नए पायलटों को विमान पर नियंत्रण पाने में करीब 10 से 15 मिनट लगे। इसके बाद भी यात्रियों को यह जानने के लिए इंतजार करना पड़ा कि विमान कहां उतरेगा।
करीब 45 मिनट के सस्पेंस के बाद कॉकपिट से घोषणा की गई कि विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर उतारा जाएगा और स्थिति नियंत्रण में है। इस संदेश के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। सुरक्षित लैंडिंग के बाद विमान में सवार लोगों को आपात स्थिति से बाहर निकाला गया।
‘डेडहेडिंग’ क्या होती है?
इस घटना के बाद कई लोगों ने पूछा कि विमान में दो अतिरिक्त पायलट क्यों मौजूद थे। यात्री और विमानन विशेषज्ञों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पायलट ड्यूटी पर थे और उन्हें तेल अवीव से दुबई लौटने वाली उड़ान संचालित करनी थी। इस तरह किसी पायलट का एक उड़ान में यात्री के रूप में यात्रा करना विमानन उद्योग में ‘डेडहेडिंग’ कहलाता है।
डेडहेडिंग में एयरलाइन अपने कर्मचारी—जैसे पायलट या केबिन क्रू—को एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्री के रूप में भेजती है, ताकि वे वहां से अपनी अगली निर्धारित ड्यूटी शुरू कर सकें। यह सामान्य परिचालन व्यवस्था का हिस्सा है। कर्मचारी उस उड़ान में काम नहीं कर रहे होते, लेकिन जरूरत पड़ने पर उनकी मौजूदगी अप्रत्याशित रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
फ्लाइट FZ1073 में भी यही हुआ। दोनों पायलट उस विमान के नियमित उड़ान दल का हिस्सा नहीं थे, लेकिन वे प्रशिक्षित पेशेवर थे और संकट के समय कॉकपिट में पहुंचकर विमान संभालने में मदद कर सके। उनकी मौजूदगी ने यात्रियों और विमान के लिए निर्णायक अंतर पैदा किया।
अतिरिक्त पायलटों की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं?
फ्लाईदुबई ने घटना के संबंध में कहा कि विमान को सुरक्षित उतारने में केबिन में मौजूद ऑन-ड्यूटी क्रू सदस्यों ने भूमिका निभाई। हालांकि, एयरलाइन ने अतिरिक्त पायलटों के नाम और नागरिकता सार्वजनिक नहीं की। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों का हवाला देते हुए उनकी पहचान बताने से परहेज किया।
ऐसी घटनाओं में कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक न करना सुरक्षा, गोपनीयता और जांच से जुड़े कारणों से हो सकता है। जब तक एयरलाइन या संबंधित अधिकारी जानकारी की पुष्टि न करें, पायलटों की राष्ट्रीयता या उनके बारे में अपुष्ट दावों को तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं होगा।
यात्री डैनियल श्लिचटर ने कॉकपिट में पहुंचकर विमान संभालने वाले पायलटों की भूमिका की सराहना की। उनके अनुसार, यात्रियों की जान बचाने में इन पायलटों का योगदान उतना ही अहम था जितना हमलावर को काबू करने वाले यात्रियों का।
संकट में टीमवर्क की अहम भूमिका
फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 की घटना दिखाती है कि विमान में आपात स्थिति के दौरान सिर्फ कॉकपिट क्रू ही नहीं, बल्कि यात्रियों और अन्य प्रशिक्षित कर्मचारियों का सहयोग भी अहम हो सकता है। कैप्टन स्मित मच्छार ने हमले के बीच विमान पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को काबू करने में मदद की और दो अतिरिक्त पायलटों ने कॉकपिट में पहुंचकर उड़ान संभाली।
हालांकि, घटना की पूरी तस्वीर जांच और आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी। यात्रियों के बयानों से सामने आया विवरण इस बात का संकेत देता है कि विमान को सुरक्षित उतारने में कई लोगों ने मिलकर काम किया। तबुक एयरपोर्ट पर हुई लैंडिंग ने उस उड़ान में सवार लोगों को एक भयावह अनुभव के बाद सुरक्षित जमीन तक पहुंचाया।























