कॉकरोच जनता पार्टी चींटी जनता पार्टी
---Advertisement---

कांग्रेस में विवाद की आग, सत्ता की ‘टेंडरिंग’ पर भाजपा का हमला

BJP-Congress Karnataka News:भाजपा नेता ने कांग्रेस के भविष्य को लेकर भी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से कांग्रेस का सफाया हो चुका है या हो रहा है, उसी तरह कर्नाटक से भी कांग्रेस का सफाया हो जाएगा।

कर्नाटक में सियासी उबाल: सिद्धारमैया का इस्तीफा और नए संकट की शुरुआत

HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस का ‘व्यावसायिक सौदा’
  • ‘हाईएस्ट बिड’ से तय हो रहे मुख्यमंत्री
  • कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या हो रही है
  • ‘टेंडरिंग मॉडल’ पर भाजपा का तंज
  • ‘बोली के खेल’ में फंसी कांग्रेस

BJP-Congress Karnataka News: कर्नाटक की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता के गलियारों में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन यह शुरुआत विवादों से घिरी हुई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस में एक अनूठा संकट पैदा हो गया है। सिद्धारमैया ने कल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद अब डीके शिवकुमार को जल्द ही यह पद सौंपा जा सकता है। इस्तीफे के तुरंत बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश के बड़े नेताओं के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कल सुबह 9 बजे राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच हुई इस अहम बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई कयास लगाए हैं।

लेकिन, इस आंतरिक कलह के बीच भाजपा (BJP) ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताते हुए कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर तीखा प्रहार करते हुए उसे ‘टेंडरिंग मॉडल’ (Tendering Model) करार दिया है।

‘टेंडरिंग व्यवस्था’ और ‘हाईएस्ट बिडर’ पर भाजपा का हमला

गौरव वल्लभ ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कर्नाटक में जो कुछ भी हो रहा है, वह किसी राजनीतिक दल के आंतरिक लोकतंत्र की तरह नहीं, बल्कि एक व्यावसायिक सौदे की तरह लग रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर सत्ता को लेकर एक तरह की ‘टेंडरिंग व्यवस्था’ (bidding system) लागू हो चुकी है।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “कांग्रेस पार्टी में अब तय हो गया है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह जनादेश या विधायकों की बात नहीं होती, बल्कि ‘हाईएस्ट बिड’ (Highest Bid) से तय होता है। जिस नेता की बोली सबसे ज्यादा होती है, यानी जो पार्टी को सबसे ज्यादा कुछ दे सकता है (चाहे वो धन या अन्य संसाधन हों), उसे मुख्यमंत्री पद थमा दिया जाता है।”

गौरव वल्लभ ने आगे कहा कि इस बार सिद्धारमैया की बोली कमजोर पड़ गई, जिसकी वजह से उन्हें पद से हटना पड़ा और डीके शिवकुमार की बोली सबसे ऊंची मानी गई। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में अब प्रोजेक्ट्स की तरह पदों की बोली लगती है। यह कर्नाटक की जनता का एक तरह से सीधा अपमान है और लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है। जनता अपने प्रतिनिधि चुनकर भेजती है, न कि यह तय करने के लिए कि सत्ता किसकी बोली पर बिकेगी।”

उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल की तर्ज पर कर्नाटक का सफाया?

भाजपा नेता ने कांग्रेस के भविष्य को लेकर भी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से कांग्रेस का सफाया हो चुका है या हो रहा है, उसी तरह कर्नाटक से भी कांग्रेस का सफाया हो जाएगा। उनका कहना था कि जब पार्टी के भीतर ही लोकतंत्र की हत्या हो रही हो और पदों की नीलामी हो रही हो, तो जनता ऐसी पार्टी को लंबे समय तक सत्ता में नहीं रहने देती।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह ‘मॉडल’ पूरी तरह से पारदर्शिता से भरा हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार की पारदर्शिता है। इस मॉडल में नेतृत्व चयन किसी राजनीतिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि ‘बोली’ लगाने की प्रक्रिया से होता है।

राहुल गांधी और ‘इंडिया’ गठबंधन पर भी सवाल

इस दौरान गौरव वल्लभ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Alliance) को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार यह दावा करती है कि राहुल गांधी विपक्षी गठबंधन के सबसे बड़े नेता हैं, लेकिन यह दावा तब तक हवाई हवाई है, जब तक यह स्पष्ट न हो कि क्या यह गठबंधन अस्तित्व में ही है या नहीं।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “इंडिया गठबंधन एक मिथक बनकर रह गया है। यह गठबंधन अलग-अलग राज्यों में अपनी-अपनी लड़ाई लड़ता है। वे कभी एक साथ नहीं दिखते। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में विपक्षी दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने की बजाय अलग-अलग मोर्चे बना लिए हैं।”

उनका कहना था कि जब एक साथ चुनाव नहीं लड़ा जा रहा, तो फिर गठबंधन के नेतृत्व का दावा करना केवल आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल पूछा कि अगर कोई गठबंधन मौजूद ही नहीं है, तो उसके ‘सबसे बड़े नेता’ होने का दावा करना कितना सही है?

कर्नाटक का यह राजनीतिक घमासान साबित करता है कि कांग्रेस के भीतर पसंद और नापसंद का खेल किस हद तक पहुंच चुका है। एक तरफ जहां सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार को सत्ता सौंपे जाने की तैयारियां हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने इसे ‘सत्ता की नीलामी’ करार देकर पार्टी की नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या इस ‘टेंडरिंग मॉडल’ के आरोपों के बीच डीके शिवकुमार प्रदेश की बागडोर संभाल पाते हैं और कांग्रेस अपनी छवि को सुधार पाती है या भाजपा के यह आरोप उसके लिए राजनीतिक रूप से घातक साबित होते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now