पिता की कथित प्रताड़ना से तंग आकर वकील ने कचहरी से लगाई छलांग

Kanpur News: प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन की ऐसी कड़वी यादें साझा कीं, जो पढ़कर रूह कांप जाती है। उसने लिखा है कि बचपन में जब उसने फ्रिज से आम का जूस पिया था, तो पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने उसे नंगा करके घर से बाहर निकाल दिया था। नोट में यह भी खुलासा हुआ कि हाईस्कूल में जब उसके नंबर कम आए थे, तब भी पिता ने उसे ऐसा ही करने की धमकी दी थी।

सुसाइड नोट ने उजागर किया वकील का 'बंदिशों' वाला जीवन

HIGHLIGHTS

  • पिता की प्रताड़ना से तंग युवा वकील ने लगाई छलांग
  • 'लाश को हाथ न लगाएं पिता', वकील ने कूदकर दी जान
  • कानपुर कचहरी से वकील की सनसनीखेज खुदकुशी
  • बचपन की यातना बनी मौत की वजह
  • पांचवीं मंजिल से गिरकर वकील ने समाप्त की जीवनलीला

UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक दिलदहला देने वाली घटना सामने आई है। कचहरी परिसर में 25 वर्षीय अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मौत से पहले उसने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक दो पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने अपने वकील पिता पर बचपन से लेकर करियर तक मानसिक प्रताड़ना और सख्ती के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और यह व्हाट्सएप स्टेटस ही अब पूरे मामले की जांच का आधार बन गया है।

बचपन की कड़वी यादें और ‘नंगा’ करने की धमकी

प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन की ऐसी कड़वी यादें साझा कीं, जो पढ़कर रूह कांप जाती है। उसने लिखा है कि बचपन में जब उसने फ्रिज से आम का जूस पिया था, तो पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने उसे नंगा करके घर से बाहर निकाल दिया था। नोट में यह भी खुलासा हुआ कि हाईस्कूल में जब उसके नंबर कम आए थे, तब भी पिता ने उसे ऐसा ही करने की धमकी दी थी।

प्रियांशु ने लिखा कि पिता हमेशा उस पर नजर रखते थे, जिससे उसे मोहल्ले में हमेशा बेइज्जती महसूस होती थी। नोट के अंत में उसने दर्द भरे शब्दों में लिखा कि भगवान मेरे जैसे पिता किसी को न दे और अपनी आखिरी इच्छा जताते हुए कहा कि उसके पिता उसकी लाश को हाथ भी न लगाएं।

करियर की घुटन और अपनी पहचान की जंजीर

खुद एक पढ़ाई-लिखाई वकील होने के बावजूद प्रियांशु अपनी पहचान बनाने में असफल रहा। नोट में उसने बताया कि उसका अपना न कोई चैंबर था, न ही कोई ऑफिस। वह दिनभर सिर्फ अपने पिता के चैंबर में काम करता था। उसे लगता था कि उसकी कोई अहमियत नहीं है।

प्रियांशु ने साफ लिखा कि वह किसी गलत संगत में नहीं था और न ही उसने कोई गलत काम किया था। फिर भी पिता की बेवजह की सख्ती और बंदिशों ने उसे जीने के लिए तंग कर दिया और मौत के रास्ते पर ढकेल दिया।

कचहरी में छाया गम, पुलिस जांच में जुटी

इस घटना के बाद कानपुर कचहरी में सन्नाटा पसर गया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और जजों का जमावड़ा मौके पर देखा गया। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और डिजिटल साक्ष्यों (फोन) की गहन जांच की जा रही है।

वहीं, बेटे की खुदकुशी से वकील पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव सदमे में हैं और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं। हजारों वकीलों वाले इस कचहरी में प्रियांशु का वो आखिरी स्टेटस चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या यह मामला सिर्फ पारिवारिक तनाव का नतीजा है, या इसके पीछे कोई और वजह भी है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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