Delhi News: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बेहद सनसनीखेज खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देते हुए देश की राजधानी में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया है। पुलिस ने 3 अलग-अलग राज्यों से 4 ऐसे कट्टरपंथी युवकों को गिरफ्तार किया है, जो ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे खतरनाक एजेंडे को अंजाम देने की तैयारी में थे। इनके पास से IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने का भारी सामान बरामद किया गया है।
खुफिया ऑपरेशन और गिरफ्तारी
यह कार्रवाई स्पेशल सेल की NDR टीम ने ACP आशीष कुमार की निगरानी में इंस्पेक्टर विनय पाल और मनोज कुमार की अगुवाई में की। खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने महाराष्ट्र से दो (ठाणे और मुंबई), ओडिशा (भुवनेश्वर) से एक और बिहार (कटिहार) से एक आरोपी को दबोचा। ये सभी अलग-अलग राज्यों में बैठे हुए एक डिजिटल नेटवर्क के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
खिलौना कार से बनाने वाले थे जानलेवा IED
जांच में सामने आया सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से दो आरोपी लोकल बाजार से सामान खरीदकर IED बनाने में जुटे थे। इनके पास से बॉल बेयरिंग, कीलें, डिब्बे और सबसे हैरान करने वाली बात— एक रिमोट कंट्रोल वाली खिलौना कार बरामद हुई है। इस खिलौना कार को ही IED के रूप में इस्तेमाल करने की योजना थी। महाराष्ट्र के एक आरोपी (जो पेशे से मैकेनिक है) को इस बम को असेंबल करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
लाल किले और इंडिया गेट की रेकी
पुलिस के मुताबिक, इस मॉड्यूल के एक सदस्य ने दिसंबर 2025 में दिल्ली आकर देश की संवेदनशीलतम जगहों— लाल किला और इंडिया गेट की रेकी की थी। उसने इन जगहों की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के साथ शेयर की थीं। माना जा रहा है कि ये लोग किसी बड़े हमले की अंतिम तैयारी में थे।
‘खुरासान की काले झंडों वाली फौज’ का जहरीला सपना
जांच एजेंसियों ने पाया कि ये चारों युवक ‘खुरासान से आने वाली काले झंडों वाली फौज’ और ‘खिलाफत’ की कट्टरपंथी सोच से गहराई तक प्रभावित थे। उनका विश्वास था कि एक दिन ऐसी फौज आएगी और भारत समेत पूरे क्षेत्र में इस्लामिक शासन स्थापित करेगी। इसी मकसद के लिए ये खुद को तैयार करने और दूसरे युवाओं को भड़काने का काम कर रहे थे।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर चलता था ‘ब्रेनवॉशिंग’ का धंधा
आरोपी एन्क्रिप्टेड (सुरक्षित) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बने क्लोज्ड ग्रुप्स के एडमिन और सदस्य थे। इन ग्रुप्स में ‘जिहाद’, ‘खिलाफत’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ पर रोजाना ब्रेनवॉशिंग की जाती थी। इनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं, जिनमें से कई डिजिटल सबूत मिले हैं।
QR कोड से जुटाते थे ‘जिहाद’ के पैसे
सिर्फ बम बनाना और लोगों को भड़काना ही नहीं, इस मॉड्यूल ने फंडिंग का एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। एक आरोपी ने अपने बैंक अकाउंट और QR कोड सोशल मीडिया पर शेयर करके लोगों से ‘जिहाद’ के नाम पर चंदा मांगा। वहीं, ओडिशा के आरोपी ने ग्रुप के लोगों से पैसे लेकर हथियार चलाने और घुड़सवारी की ट्रेनिंग दिलाने का झूठा वादा किया।
कौन हैं ये 4 आरोपी?
पुलिस ने इन चारों आरोपियों की पहचान और उनके बैकग्राउंड का खुलासा किया है:
- मोसाइब अहमद उर्फ सोनू उर्फ कलाम मूलतः आजमगढ़, UP, पकड़ा गया ठाणे, महाराष्ट्र से): पेशे से मैकेनिक (वेल्डर, ऑटो मैकेनिक)। विदेशों में भी काम कर चुका है। IED बनाने में तकनीकी एक्सपर्ट।
- मोहम्मद हम्माद (मुंबई, महाराष्ट्र): 12वीं का छात्र। जनवरी 2026 में नेटवर्क से जुड़ा। IED बनाने के लिए खिलौना कार, बॉल बेयरिंग और कीलें खरीदकर मोसाइब को देने वाला मुख्य आपूर्तिकर्ता।
- शेख इमरान (भुवनेश्वर, ओडिशा): पेशे से सिक्योरिटी गार्ड और डिलीवरी बॉय। 2024 में कट्टरपंथी भाषणों से भड़का। राम मंदिर, संसद और सैन्य ठिकानों पर हमले की बात करता था।
- मोहम्मद सोहैल (कटिहार, बिहार): पेशे से प्लंबर। मार्च 2026 से युवाओं को भड़काने और हथियार इकट्ठा करने की अपील कर रहा था। फंडिंग के लिए QR कोड शेयर करने वाला मुख्य व्यक्ति।
जांच जारी, अंतरराष्ट्रीय लिंक्स पर नजर
दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल इनसे पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय लिंक्स और इनके संपर्क में आने वाले अन्य संदिग्ध लोगों की पड़ताल में जुटी हैं।





















