Delhi News: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में चल रहा सीपीए (सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी) का कथित 650 करोड़ रुपये का घोटाला अब दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में भारी भूचाल ला चुका है। इस मामले की जांच जैसे-जैसे गहराती जा रही है, वैसे-वैसे सरकारी महकमे में डंगे फूंकने का सिलसिला तेज होता जा रहा है। घोटाले के खुलासे के बाद से लगातार ट्रांसफर, सस्पेंशन और बर्खास्तगी की एक बड़ी कार्रवाई जारी है, जिसमें अब तक कुल 148 लोगों का तबादला किया जा चुका है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
74 डॉक्टरों का बड़ा तबादला
बता दें कि सीपीए घोटाले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का ताजा और सबसे बड़ा चौंकाने वाला कदम देर रात उठाया गया। तिहाड़ स्थित सीजेएच (सेंट्रल जेल हॉस्पिटल) से लेकर दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों तक में तैनात कुल 74 डॉक्टरों को एकहत्तरफा तबादला आदेश जारी कर दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि तिहाड़ जेल अस्पताल सहित कई अन्य अस्पतालों में ये डॉक्टर और मेडिकल ऑफिसर वर्षों से एक ही जगह काबिज थे। लंबे समय तक एक जगह बैठने के कारण इनकी कथित रूप से महकमे में अपनी एक अलग पैठ बन चुकी थी। इस ट्रांसफर लिस्ट में सिर्फ सेंट्रल जेल अस्पताल के 29 डॉक्टर शामिल हैं। इसके अलावा महावीर हॉस्पिटल, बाबासाहेब अंबेडकर हॉस्पिटल, इंदिरा गांधी हॉस्पिटल, सत्यवती राजा हरिश्चंद्र हॉस्पिटल, जीटीबी हॉस्पिटल और लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल से भी डॉक्टरों को शिफ्ट किया गया है।
जाने 148 ट्रांसफर का पूरी जानकारी
बता दें कि इस रात के बड़े ऑपरेशन से पहले, दिल्ली सरकार ने सीपीए में लंबे समय से बैठे कर्मचारियों को हटाने की पहल की थी। जिसमें पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने 39 डॉक्टरों और 35 फार्मासिस्टों के ट्रांसफर के लिए दिल्ली के राज्यपाल को संस्तुति (सुझाव) भेजी थी। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही इन सभी का तबादला कर दिया गया।
अगर हम आंकड़ों को जोड़ें तो अब तक कुल 148 लोगों (74 नए + 39 डॉक्टर + 35 फार्मासिस्ट) का ट्रांसफर हो चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार किसी एक विभाग में एक साथ कितनी बड़ी सफाई अभियान चला रही है।
बर्खास्तगी और निलंबन
बता दें कि शीर्ष अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद अब मशीनरी के निचले स्तर पर काम करने वाले उन कर्मचारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है, जो कथित तौर पर इस घोटाले में मददगार बने। जो कि सोमवार को मौजूदा डीजीएचएस डॉक्टर सुषमा जैन ने कड़ा फैसला लेते हुए डेटा असिस्टेंट सुमित सिंह को सेवा से ही बर्खास्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, डीजीएचएस कार्यालय में तैनात दो अन्य कर्मचारियों उमेश त्यागी और कपिल (असिस्टेंट) को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में चल रही इस इनकाउंटर (सफाई) की रफ्तार अभी और तेज होने वाली है। सूत्रों की मानें तो पूर्व डीजीएचएस वत्सला अग्रवाल का एक बड़ा नेटवर्क सीपीए और डीजीएचएस ऑफिस में फैला हुआ था। एसीबी की पूछताछ में जो नए नाम सामने आ रहे हैं, उसके आधार पर आने वाले दिनों में और भी कई करीबी कर्मचारियों और अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।





















