Delhi News: डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अब आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों की समस्याओं और उनकी खराब होती स्थिति को देखते हुए शिवसेना (शिंदे गुट) और डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने एकजुट होकर सरकार के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से उठाने का निर्णय लिया है। दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से घोषणा की है कि आगामी 20 जून को सुबह 11 बजे एक विशाल प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह से मुलाकात करेगा और कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपेगा।
शिवसेना (शिंदे गुट) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष संदीप चौधरी और डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि वर्षों से डीटीसी के अनुबंध कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। कर्मचारियों की जायज मांगें लगातार लंबित पड़ी हैं, जिससे उनमें भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर गंभीर हुई शिवसेना
संदीप चौधरी ने कहा कि डीटीसी के हजारों कर्मचारी दिन-रात राजधानी की परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वह सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं जिनके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिससे वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पहले भी आयोजित कार्यक्रमों के दौरान शिवसेना ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया था कि उनकी आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। अब उसी वादे को निभाने के लिए संगठन ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि 20 जून को पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से परिवहन मंत्री से मुलाकात कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की जाएगी।
रोहिणी से शुरू होगा मार्च
जानकारी के अनुसार यह पूरा कार्यक्रम रोहिणी स्थित शिवसेना के प्रदेश कार्यालय से शुरू होगा। यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी, पदाधिकारी और यूनियन के सदस्य एकत्रित होंगे। इसके बाद सभी लोग एकजुट होकर परिवहन मंत्री के कार्यालय तक मार्च करेंगे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे।
आयोजकों का दावा है कि इस कार्यक्रम में दिल्ली के विभिन्न डिपो और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल होंगे। विशेष रूप से नांगलोई, नजफगढ़ रोड, कुंवर सिंह नगर और रोहिणी क्षेत्र से कर्मचारियों की भारी भागीदारी की उम्मीद जताई जा रही है।
बेसिक डीए और ग्रेड पे की फाइल तैयार
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने कहा कि संगठन की संबद्धता शिवसेना से है और दोनों मिलकर कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए बेसिक डीए और ग्रेड पे से संबंधित फाइल तैयार हो चुकी है, लेकिन सरकार द्वारा इसे लागू करने में लगातार देरी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही है, जिसके कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्रमुख मांगों में स्थायीकरण सबसे अहम
डीटीसी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांगों में स्थायीकरण शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। उनका यह भी कहना है कि यदि सरकार निजी कंपनियों से बसें संचालित करा रही है तो उन बसों को डीटीसी की पहचान देने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। कर्मचारियों की मांग है कि निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और लंबे समय से कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
यूनियन का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और नियमित कर्मचारियों के बीच वेतन एवं भत्तों को लेकर बड़ा अंतर है। कर्मचारियों की मांग है कि दिल्ली सरकार द्वारा स्वीकृत सभी वेतनमान, बेसिक डीए, ग्रेड पे और अन्य भत्तों को अनुबंध कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू किया जाए। उनका तर्क है कि जब दोनों वर्गों के कर्मचारी समान कार्य कर रहे हैं तो उन्हें समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
ट्रांसफर में भ्रष्टाचार के आरोप
कर्मचारियों ने विभाग में तबादलों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और कई मामलों में भ्रष्टाचार तथा तानाशाहीपूर्ण रवैया देखने को मिलता है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। यूनियन ने मांग की है कि तबादलों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए।
सफाई कर्मचारियों को लेकर भी यूनियन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई सफाई कर्मियों को केवल चार घंटे की नौकरी दी जा रही है, जो श्रम कानूनों की भावना के विपरीत है। यूनियन ने मांग की है कि उनके कार्य घंटे बढ़ाए जाएं और उन्हें ईएसआईसी तथा पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए।
इसके अलावा अनुकंपा के आधार पर नियुक्त कई दिव्यांग कर्मचारी पिछले 14 वर्षों से अनुबंध पर कार्य कर रहे हैं। यूनियन का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों को तत्काल स्थायी नियुक्ति दी जानी चाहिए।
मेडिकल और यात्रा भत्ते की मांग
कर्मचारियों ने यात्रा भत्ता (TA) और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि विभागीय कार्यों के लिए लगातार यात्रा करने वाले कर्मचारियों को यात्रा भत्ता दिया जाना चाहिए।
साथ ही ईएसआईसी सेवाएं बंद होने के बाद कर्मचारियों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यूनियन ने मांग की है कि मेडिकल सुविधाओं को सीधे डीटीसी के माध्यम से बहाल किया जाए ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत मिल सके।
शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान
ललित चौधरी ने सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों, चालकों, परिचालकों और सहायकों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों, रोजगार सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि 20 जून का कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित रहेगा। अब सभी की निगाहें परिवहन मंत्री के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जहां कर्मचारियों को अपनी समस्याएं सीधे सरकार के सामने रखने का अवसर मिलेगा।






















