Delhi News: दिल्ली दंगों (2020) के मुख्य आरोपियों में शामिल उमर खालिद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 5 जनवरी को अपनी जमानत याचिका खारिज होने के बाद, उन्होंने अब इस फैसले को चुनौती देते हुए एक पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर की है। सबसे खास बात यह है कि खालिद ने अपनी इस याचिका की सुनवाई ‘खुली अदालत’ (ओपन कोर्ट) में कराने की अपील की है।
क्यों खास है ‘ओपन कोर्ट’ की मांग?
सुप्रीम कोर्ट के प्रक्रियात्मक नियमों के अनुसार, पुनर्विचार याचिकाओं पर आमतौर पर जजों के चैंबर (कक्ष) में ही विचार किया जाता है और इसमें फैसला बंद दरवाजों के पीछे लिया जाता है। हालांकि, उमर खालिद ने इस कानूनी परंपरा से अलग हटते हुए अपनी दलीलों को सबके सामने रखने की मांग की है। वह चाहते हैं कि उनके मामले में न्यायिक प्रक्रिया का पूरा चित्र जनता के सामने आए।
15 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के समक्ष इस रिव्यू पिटीशन का जिक्र किया। बेंच ने मामले को संज्ञान में लेते हुए 15 अप्रैल को सुनवाई का निर्धारण किया है। खुली अदालत में सुनवाई की मांग पर जस्टिस सूर्यकांत ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम इसे देखेंगे और सुनने की प्रक्रिया तय करेंगे।” इससे संकेत मिलता है कि अदालत इस असामान्य मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।
5 जनवरी के फैसले और पूरे मामले का बैकग्राउंड
गौरतलब है कि इससे पहले 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की जमानत याचिका स्पष्ट तौर पर खारिज कर दी थी। खालिद पर फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों को अंजाम देने की साजिश रचने का आरोप है और उन्हें UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय से जेल में बंद उमर खालिद को इससे पहले दिल्ली की निचली अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया था।
अब क्या होगा?
15 अप्रैल की सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है। इस दिन सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या वह अपने 5 जनवरी के पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए तैयार है। साथ ही, देश की सबसे बड़ी अदालत किसी पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के लिए अपने दशकों पुराने नियमों में बदलाव करते हुए ‘ओपन कोर्ट’ का रास्ता अपनाती है या नहीं—इस पर पूरी नजर होगी।





















