Delhi News: आज के समय में देश की राजनीति में स्वच्छता अभियान का नाम बड़े ही गर्व से लिया जाता है। खासतौर पर दिल्ली भाजपा सरकार ने यमुना नदी क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में स्वच्छता का ढोंग रच रखा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम जनता इस अभियान से न तो खुश है और न ही इससे कोई लाभ मिला है। जनता का कहना है कि यह सिर्फ एक दिखावा है, जिसका कोई वास्तविक परिणाम नहीं दिख रहा है। जनता का दर्द यह है कि घर और आसपास की सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है, जबकि असली समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्वच्छता का ढोंग और जनता का गुस्सा
यमुना नदी पर आज सभी दिल्ली भाजपा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से लेकर विधायकों तक स्वच्छता का अभियान चल रहा है। बड़े-बड़े होर्डिंग्स, पब्लिक मीटिंग्स, और सोशल मीडिया पर पोस्ट्स के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार स्वच्छता के प्रति बहुत जागरूक है। लेकिन, जमीन पर जाकर देखा जाए तो यह सब केवल दिखावे का खेल बन कर रह गया है। स्थानीय जनता का कहना है कि इस स्वच्छता अभियान का कोई वास्ता उनके जीवन से नहीं है। जहां घर के बाहर गंदगी और बदबू का साम्राज्य कायम है, वहाँ कोई देखने वाला नहीं है।
गंदगी और बदबू का आतंक
आम जनता रोजाना गंदगी और बदबू से परेशान है। घर के बाहर सीवर जाम की समस्या आम बात हो गई है। कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रहती है। गंदगी के कारण कई बार बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है। जनता का कहना है कि शिकायतें विधायक, एमसीडी और प्रशासन तक पहुंचती हैं, लेकिन न तो कोई समाधान होता है और न ही कोई सुनवाई। जनता का गुस्सा इस बात का सबूत है कि वह अब इन शिकायतों का हल नहीं देख पा रही है।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जनता का कहना है कि वे ऑनलाइन शिकायतें करते हैं, लिखित रूप में शिकायत देते हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। यहां तक कि कई लोग तो अपने घरों के बाहर ही गंदगी के कारण परेशान हैं, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस स्थिति से जनता में निराशा और असंतोष व्याप्त है।
स्वच्छता अभियान का दिखावा
बता दें कि कई जगहों पर यह देखा गया है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन स्वच्छता का ढोंग कर रहे हैं। वे केवल फोटो खिंचवाने और प्रचार के लिए ही स्वच्छता अभियान चलाते हैं। जनता का आरोप है कि यदि वास्तव में स्वच्छता अभियान सफल होता तो घर के बाहर और गलियों में गंदगी का नामोनिशान नहीं होता। लेकिन हकीकत यह है कि गली-गली में कूड़ा-करकट, सीवर जाम और गंदगी का बोलबाला है।
प्राइवेट गाड़ियों का चलन और भ्रष्टाचार
कुछ इलाकों में यह भी शिकायत है कि सरकारी फ्री सुविधाओं के बावजूद जनता को पैसे देकर ही गाड़ियों को गलियों में घुसाना पड़ता है। यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा रूप है, जो जनता के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। जनता का कहना है कि बिना पैसे दिए गली में गाड़ी खड़ी करना या कूड़ा फेंकना भी अब संभव नहीं रहा है। इस भ्रष्टाचार का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्वच्छता का झूठा प्रचार और हकीकत
देखा जाए तो बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां जनता ने अपने अनुभवों को साझा किया है। वे कहते हैं कि सरकार और विधायक के कहने पर स्वच्छता का अभियान चलाया जाता है, लेकिन जब जनता स्वयं स्वच्छता के लिए बाहर निकलती है तो वहाँ गंदगी और बदबू का साम्राज्य कायम होता है। जनता का कहना है कि यदि अधिकारियों और नेताओं को वास्तव में स्वच्छता का ख्याल होता तो वे स्वयं जाकर गंदगी साफ करते। लेकिन वे केवल दिखावा कर रहे हैं।
जनता का आक्रोश
आम जनता का कहना है कि उन्हें सरकार से उम्मीद थी कि स्वच्छता के नाम पर उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन यह सब केवल एक दिखावा है। घर के बाहर सीवर जाम हो, गलियों में कूड़ा फैला हो, और बदबू का माहौल हो, तो जनता का जीवन नरक बन जाता है। शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे जनता का भरोसा सरकार से उठ चुका है।






















