दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, 10 गिरफ्तार

Delhi News: जांच में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (RLA) का हुआ। यहां तैनात एक क्लर्क सुभाष चंद ने बिचौलियों के साथ मिलकर 350 से अधिक चोरी की गाड़ियों को फर्जी दस्तावेज़ों पर वैध रूप से पंजीकृत करा दिया।

शोरूम के जरिए चलता था अवैध कारोबार

HIGHLIGHTS

  • 'कंपनी' जैसा चलता था चोरी का धंधा!
  • जानें कैसे एक-एक काम के लिए थे अलग एक्सपर्ट
  • शातिर गिरोह के खौफनाक कनेक्शन का खुलासा
  • दिल्ली पुलिस ने 'री-बर्थ' कार गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर किया
  • दिल्ली-हरियाणा-पंजाब-हिमाचल पर चलता था गिरोह का जाल

Delhi News: दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच (इंटर स्टेट सेल) ने एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय वाहन चोर और जालसाज गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह सिंडिकेट चोरी और लोन डिफॉल्टर की गाड़ियों का चेसिस नंबर बदलकर, फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर उन्हें बाजार में ‘साफ-सुथरी’ गाड़ी के रूप में बेचता था। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 31 लग्ज़री गाड़ियां बरामद की हैं।

पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम के अनुसार, अब तक की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अब तक 1000 से अधिक गाड़ियों की धंधा कर चुका है। इस गिरोह का खुलासा 5 अगस्त 2025 को पीतमपुरा से चोरी हुई एक हुंडई क्रेटा की जांच के दौरान हुआ, जिसके बाद पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में छापेमारी की।

हिमाचल प्रदेश के परिवहन विभाग में साठगांठ

जांच में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (RLA) का हुआ। यहां तैनात एक क्लर्क सुभाष चंद ने बिचौलियों के साथ मिलकर 350 से अधिक चोरी की गाड़ियों को फर्जी दस्तावेज़ों पर वैध रूप से पंजीकृत करा दिया। ये लोग परिवहन विभाग के वाहन पोर्टल का दुरुपयोग करते थे और ओटीपी (OTP) से छेड़छाड़ कर अवैध रूप से सिस्टम में लॉगिन करते थे।

कंपनी जैसा ‘स्पेशलाइज्ड’ वर्किंग मॉडल

पुलिस की पड़ताल से सामने आया कि गिरोह ने अपने काम को किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह अलग-अलग विभागों में बांट रखा था:

  • सरगना: जालंधर निवासी दमनदीप सिंह उर्फ लकी, जो एक सेकेंड हैंड कार शोरूम का मालिक है।
  • सप्लायर्स: मनबीर उर्फ मिंटा और हेमराज उर्फ हेमा ऑटो-लिफ्टर्स से चोरी की गाड़ियां खरीदते थे।
  • टेक्नीशियन: फरीदाबाद का प्रदीप सिंह उर्फ हीरा। यह गाड़ियों के असली चेसिस नंबर को मिटाकर नया नंबर पंच करने में एक्सपर्ट था।
  • डॉक्यूमेंट एक्सपर्ट: बीटेक स्नातक अरविंद शर्मा। यह फर्जी सेल लेटर (फॉर्म-21) और बैंकों के फर्जी एनओसी (NOC) तैयार करता था।
  • डीलर्स: कवलजीत और बृजमोहन इन गाड़ियों को असली ग्राहकों को धोखाधड़ी से बेचते थे।

नशे के तस्करों से भी जुड़ते हैं तार

डीसीपी आदित्य गौतम ने एक और खतरनाक पहलू का खुलासा किया। गिरोह का एक सदस्य तिफले नौखेज नार्को सिंडिकेट (नशा तस्करी गिरोह) से सीधे जुड़ा है। तिफले इन चोरी की और ‘साफ’ की गई गाड़ियों का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी के लिए करता था, ताकि पुलिस की चेकिंग के दौरान गाड़ी का नंबर वेरिफाई होने पर कोई संदेह न हो।

इतनी बड़ी मात्रा में बरामद हुई लग्ज़री गाड़ियां

पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान 11 टोयोटा फॉर्च्यूनर, 6 हुंडई क्रेटा, 6 किया सेल्टोस, 3 इनोवा के अलावा महिंद्रा स्कॉर्पियो-N और थार जैसी कई हाई-एंड गाड़ियां बरामद की हैं। गाड़ियों के चेसिस नंबर बदलने में इस्तेमाल होने वाले भारी और आधुनिक उपकरण भी पुलिस ने जब्त किए हैं।

वर्तमान में पुलिस गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़ी बरामदगी की उम्मीद जताई जा रही है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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