Delhi News: दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देते हुए, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस के लिए एक क्रांतिकारी और महत्वाकांक्षी ‘रोडमैप’ पेश किया है। यह रोडमैप केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का खाका है।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने साफ तौर पर संदेश दिया है कि पुलिस बल को अब पुराने और ढुलमुल तरीकों से ‘लीक से हटकर’ सोचना होगा। उनके इस नए विजन का आधार दो मुख्य स्तंभ हैं—अत्याधुनिक तकनीक का गुणकरण और आम जनता की सक्रिय भागीदारी। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
तकनीक का तोड़
आधुनिक अपराध अब सीमाओं से परे हो चुके हैं और अपराधियों के तरीके भी हाई-टेक हो गए हैं। ऐसे में पुराने ढंग से चलने वाली पुलिसिंग अब काम नहीं आएगी। उपराज्यपाल ने अपराध रोकथाम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन तकनीक के व्यापक इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।
- भविष्यसूचक पुलिसिंग: AI की मदद से पुलिस डेटा एनालिसिस करके यह अनुमान लगा सकती है कि किसी विशेष इलाके में किस समय अपराध की संभावना सबसे ज्यादा है।
- फेस रिकग्निशन और डिजिटल निगरानी: सीसीटीवी नेटवर्क को AI से जोड़कर भीड़ में छुपे अपराधियों या वांछित अपराधियों की पहचान सेकंडों में की जा सकेगी।
- ड्रोन सर्विलांस: संवेदनशील इलाकों, बॉर्डर एरिया, और भारी भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी की जाएगी। यह न केवल अपराधियों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखेगा, बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तेजी से पुलिस बल को रिस्पॉन्स देने में मदद करेगा।
सामुदायिक पुलिसिंग का नया मॉडल
उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और स्थानीय बाजार संघों के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि अब अपराध रोकने के लिए पुलिस को ही सड़कों पर उतरना नहीं होगा, बल्कि आम नागरिक पुलिस की ‘आंख और कान’ के रूप में काम करेंगे। स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत बनाया जाएगा। अगर किसी गली में कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखता है, तो आरडब्लूए के माध्यम से तुरंत पुलिस तक यह जानकारी पहुंचेगी। इससे न सिर्फ अपराधियों में डर पैदा होगा, बल्कि पुलिस और जनता के बीच की दूरी भी खत्म होगी।
Met with senior officers of @DelhiPolice at the Delhi Police Headquarters today and reviewed key operational and welfare priorities. Reiterated the need for humane, visible, and proactive citizen-centric policing that strengthens public trust and confidence.
Directed the force… pic.twitter.com/sdz1WMfgrf
— LG Delhi (@LtGovDelhi) June 24, 2026
गलत दिशा में चलने वालों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’
दिल्ली की सड़कों पर यातायात का हाल बेहद खराब रहता है। सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यातायात नियमों के उल्लंघनों, विशेषकर ‘गलत दिशा’ में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
अब कोई भी व्यक्ति गलत दिशा से वाहन नहीं चला सकेगा। प्रमुख जाम वाले चौराहों और बिंदुओं पर सख्ती बरती जाएगी। हालांकि, सजा के साथ-साथ पुलिस को वाहन चालकों के मनोविज्ञान में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाने होंगे, ताकि लोग डर से नहीं, बल्कि जागरूकता से नियमों का पालन करें।
पुलिस कर्मियों का कल्याण और ‘जीरो-वेस्ट’ मॉडल
एलजी ने यह भी समझा है कि जब तक पुलिसकर्मी खुद सुरक्षित और खुश नहीं होंगे, तब तक वे शहर को सुरक्षित नहीं बना सकते। इसलिए, पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने के लिए कल्याणकारी कदमों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
एक अनोखी पहल के तहत, सभी पुलिस आवासीय परिसरों को ‘जीरो-वेस्ट’ (कचरा मुक्त) मॉडल के रूप में विकसित करने का विजन रखा गया है। इससे पुलिसकर्मियों के रहने का माहौल स्वच्छ और स्वस्थ होगा। इसके अलावा, बल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि महिलाओं से जुड़े अपराधों की जांच और संवेदनशीलता से की जा सके।
दिल्ली की मौजूदा चुनौतियां और नई उम्मीदें
दिल्ली एक मेगा सिटी है और यहां कानून-व्यवस्था हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण विषय रहा है। हाल के आंकड़े चिंताजनक हैं—चेन स्नैचिंग, मोबाइल चोरी और महिलाओं के विरुद्ध अपराध राजधानी की सबसे बड़ी नाकाबंदी हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस पहले से ही ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ और डिजिटल निगरानी के जरिए अच्छा काम कर रही है।
एलजी का यह नया रोडमैप इसी कड़ी को और मजबूत करता है। ड्रोन और AI चेन स्नैचिंग और मोबाइल चोरी जैसे अपराधों को रोकने में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं, जबकि सामुदायिक पुलिसिंग से इलाकों में पुलिस की मौजूदगी एक ‘अदृश्य सुरक्षा घेरा’ बन जाएगी।






















