दिल्ली पुलिस ने उखाड़ा कैंसर दवाओं का अंतरराष्ट्रीय रैकेट

गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान 39 वर्षीय मनीष शर्मा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से फरीदाबाद का निवासी है। दिलचस्प और डरावनी बात यह है कि मनीष ने रूस से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी, लेकिन जब वह वर्ष 2014 में भारत लौटा, तो वह वैध रूप से यहां प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर सका।

फेल डॉक्टर का नकली कैंसर दवाओं का अंतरराष्ट्रीय रैकेट

HIGHLIGHTS

  • नकली डॉक्टर बेच रहा था कैंसर की जानलेवा दवाएं
  • रूस में पढ़ाई, तुर्की से लाई नकली कैंसर दवाएं
  • इंडियामार्ट पर बेच रहा था नकली कैंसर की दवाएं
  • 17 लाख की नकली कैंसर दवा बेचने वाला गिरफ्तार

दिल्ली में कैंसर के इलाज का नाम लेकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच (Delhi Police Crime Branch) ने इस रैकेट का पर्दाफाश करते हुए एक शर्मनाक सच सामने लाया है, जहां एक ऐसा शख्स गरीब और बीमार मरीजों को नकली और प्रतिबंधित दवाएं थोक भाव में बेच रहा था, जिसके पास भारत में इलाज करने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं था।

कौन है यह आरोपी डॉक्टर?

गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान 39 वर्षीय मनीष शर्मा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से फरीदाबाद का निवासी है। दिलचस्प और डरावनी बात यह है कि मनीष ने रूस से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी, लेकिन जब वह वर्ष 2014 में भारत लौटा, तो वह वैध रूप से यहां प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर सका। भारत में बिना इस परीक्षा को पास किए किसी भी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को इलाज करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन मनीष ने नियमों को ताक पर रखते हुए शॉर्टकट से अमीर बनने के चक्कर में मरीजों की जिंदगी से खेलना शुरू कर दिया।

पत्नी के नाम पर बनाई फर्जी कंपनी

परीक्षा फेल होने के बाद भी मनीष ने फरीदाबाद के जवाहर कॉलोनी में ‘केएमसी हॉस्पिटल’ का झूठा बोर्ड लगा लिया। साल 2023 में शादी के बाद उसने सोहना में इस अवैध अस्पताल की एक और ब्रांच खोल दी। उसने कमीशन के लालच में कुछ फ्रीलांसर डॉक्टरों को भी अपने चंगुल में फंसा लिया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उसने अपनी पत्नी के पते का इस्तेमाल करके एक फर्जी फर्म बना ली और लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘IndiaMART’ पर लाइफ-सेविंग कैंसर दवाओं के थोक विक्रेता के रूप में खुद को रजिस्टर करा लिया। 80 से 90 प्रतिशत तक के भारी मुनाफे के लालच ने उसे इंसानियत से इतना दूर धकेल दिया कि वह मरीजों को नकली दवाएं असली कीमतों पर बेच रहा था।

तुर्की से भारत तक का अवैध रूट और सुखदेव विहार में गिरफ्तारी

जब क्राइम ब्रांच को इस रैकेट की तस्दीक हुई, तो टीम ने सक्रियता दिखाते हुए सुखदेव विहार इलाके में एक सूचना के आधार पर घेराबंदी की। आरोपी एक होंडा सिटी कार में सफर कर रहा था, जिसे पुलिस ने ट्रैक करके रोक लिया। कार से उसे गिरफ्तार किया गया और तलाशी लेने पर खतरनाक खेल सामने आया।

प्रारंभिक पड़ताल में खुलासा हुआ कि मनीष के पास से जो दवाएं बरामद हुई हैं, वे अमेरिका और जापान की दिग्गज फार्मा कंपनियों के नाम से चल रही थीं। लेकिन सच यह था कि ये पूरी तरह से नकली थीं और इन्हें तुर्किये (Turkey) में जाली तरीके से तैयार करके बिना किसी कस्टम ड्यूटी और मेडिकल क्लियरेंस के भारत में अवैध चैनलों से भेजा जा रहा था। ये दवाएं भारत में बिक्री के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से मंजूर तक नहीं थीं।

आरोपी के कब्जे से बरामद हुईं ये खतरनाक और महंगी दवाएं

पुलिस ने आरोपी से ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) और मल्टीपल मायलोमा जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तीन प्रमुख श्रेणियों की दवाएं बरामद की हैं। यह एक बेहद खतरनाक और महंगी दवा है, जिसका इस्तेमाल एडवांस्ड यानी अंतिम चरण के ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) के इलाज में होता है। यह कैंसर कोशिकाओं की बढ़त को रोकती है। भारत में इसकी बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। अमेरिका में इसके एक बॉक्स की कीमत लगभग 17 हजार डॉलर (करीब 17 लाख रुपये) है। पुलिस ने इसके चार पैकेट बरामद किए हैं।

यह एक ‘लाइफ-सेविंग प्लाज्मा वॉल्यूम एक्सपेंडर’ है, जिसे गंभीर रूप से बीमार मरीजों में ब्लड वॉल्यूम बनाए रखने के लिए दिया जाता है। बरामद की गई पूरी खेप तुर्किये की बताई जा रही है। अगर इसे वैध माध्यम से भारत में खरीदा जाए तो इसके एक बॉक्स की कीमत करीब 5,800 रुपये पड़ती है, लेकिन यह बिना किसी मेडिकल सुरक्षा मानक के तस्करी के जरिए लाया गया था।

यह मल्टीपल मायलोमा (बोन मैरो कैंसर) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक लक्षित एंटीबॉडी थेरेपी है। यह भी तुर्किये से अवैध रूप से भारत लाई गई थी। भारत में अधिकृत आयात के तहत इसके एक सिंगल वायल की कीमत करीब 2.27 लाख रुपये है। पुलिस ने इसके दो बॉक्स बरामद किए हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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