Delhi News: दिल्ली की जाम की समस्या से जूझ रहे वाहन चालकों के लिए अब राहत की उम्मीद जगी है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की है जिसमें दिल्ली पुलिस (यातायात) और दिल्ली पुलिस आयुक्त के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक का उद्देश्य दिल्ली की यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना था। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
टारगेटेड एक्शन’ के निर्देश
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली में बार-बार जाम लगने वाले प्रमुख बिंदुओं (कंजेशन पॉइंट्स) की पहचान कर उन पर ‘टारगेटेड एक्शन’ लेने का निर्देश दिया है, उन्होंने स्पष्ट किया कि इंजीनियरिंग हस्तक्षेप, सड़क डिजाइन में सुधार और आधुनिक तकनीक के प्रयोग से ट्रैफिक की स्थिति में सुधार संभव है। खासतौर पर यू-टर्न का सही प्रबंधन, सिग्नलिंग व्यवस्था का उन्नयन और सड़क डिजाइन में बदलाव से जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बैठक में यह भी माना गया कि तकनीक का प्रयोग, जैसे स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, सेंसर और वीडियो एनालिटिक्स, ट्रैफिक प्रवाह को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इंजीनियरिंग के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का समावेश कर दिल्ली की सड़क व्यवस्था को ‘फ्यूचर-रेडी’ बनाया जाएगा। इससे न केवल जाम से राहत मिलेगी, बल्कि यातायात का सुगम संचालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
यातायात नियम तोड़ने वालों पर सख्त
बता दें कि बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यातायात नियमों के उल्लंघन पर केंद्रित रहा है जिसमें उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गलत दिशा में वाहन चलाने और अनाधिकृत पार्किंग को दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इन दोनों मोर्चों पर कोई भी ढील नहीं बरती जानी चाहिए। खासतौर पर सड़क के किनारे होने वाली अवैध पार्किंग को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
जिसमें यातायात नियम उल्लंघन के खिलाफ पुलिस को निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से कार्रवाई करें। गलत दिशा में गाड़ी चलाने और अवैध पार्किंग पर कार्रवाई का अभियान तेज किया जाएगा। इससे न केवल जाम की समस्या कम होगी, बल्कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही, यातायात व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए निरंतर निगरानी और कार्रवाई की योजना बनाई गई है।
ट्रैफिक की समस्या के लिए ‘प्रोजेक्ट संगम’
दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए ‘प्रोजेक्ट संगम’ को एक गेम-चेंजर माना जा रहा है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इस परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि जब तक जनता को इस व्यवस्था में सीधे तौर पर शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और ट्रैफिक अधिकारियों के बीच संवाद स्थापित किया जाएगा। हर इलाके की भौगोलिक स्थिति, ट्रैफिक लोड और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर समाधान तैयार किए जाएंगे।
Reviewed a detailed presentation by @dtptraffic today, along with @CPDelhi and senior officials. It is encouraging to see the focused efforts and strategic interventions being undertaken to improve traffic management across Delhi.
Targeted action to address major congestion… pic.twitter.com/YQHEiJzp9P
— LG Delhi (@LtGovDelhi) June 29, 2026
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने ‘इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ (ITMS) के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक कंट्रोल को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यातायात का प्रबंधन मैन्युअल के बजाय डेटा-आधारित होगा। इससे यातायात की स्थिति का त्वरित विश्लेषण संभव हो सकेगा और समुचित कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रगति और परिणाम
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की कड़ी निगरानी और दिल्ली पुलिस की नई कार्यशैली का परिणाम दिखने लगा है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान पहचाने गए 62 प्राथमिकता वाले हॉटस्पॉट में से 34 स्थानों पर ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आई है। इनमें पुश्ता रोड (कैलाश नगर), खजूरी चौक और तीन मूर्ति गोलचक्कर जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन जगहों पर क्रमशः 82.59%, 74.29% और 66.01% की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, कुछ स्थान जैसे नारायणा फ्लाईओवर, साउथ-एक्स पार्ट-I, मैक्स हॉस्पिटल और भवभूति मार्ग पर ट्रैफिक जाम में बढ़ोतरी हुई है, जो सड़क निर्माण और अन्य कारणों से हुई है।
सामान्यतः, द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और डाबरी गोलचक्कर पर लगातार ट्रैफिक की समस्या बनी हुई है। इन स्थानों पर आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल सुधारों के साथ-साथ अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है। इसके लिए DMRC, PWD, NHAI, DTC, NDMC और MCD जैसी सिविक एजेंसियों के बीच सक्रिय समन्वय बैठकें और संयुक्त सर्वे चलाए जा रहे हैं।






















