दिल्ली-एनसीआर में मौसम बदलने के साथ-साथ वायरल इन्फेक्शन और फ्लू के मामलों में भारी उछाल देखा जा रहा है। खासकर एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षा जगत को भी चिंतित कर दिया है। लंबे समय तक बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के साथ बच्चों में बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी के कई प्रतिष्ठित स्कूलों ने अभिभावकों के लिए एक सलाहपत्र (एडवाइजरी) जारी किया है। इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ स्कूल परिसर में संक्रमण की चेन को तोड़ना है।
सरकारी आंकड़े हैं चिंताजनक
दिल्ली में एच1एन1 के बढ़ते ग्राफ को अगर आंकड़ों के नजरिए से देखें तो स्थिति काफी गंभीर नजर आती है। हाल के सरकारी आंकड़ों की मानें तो, इस साल अब तक राजधानी में एच1एन1 के कुल 1777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि केवल 20 अगस्त को ही 114 नए मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि संक्रमण किस तेजी से अपने पैर पसार रहा है।
जानिए एडवाइजरी के मुख्य बिंदु
दिल्ली के अलग-अलग जोन में स्थित प्राइवेट स्कूलों ने इस बीमारी को लेकर सतर्कता बरतना शुरू कर दिया है। दक्षिणी दिल्ली के टैगोर इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल मल्लिका प्रेमन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी काफी स्पष्ट है। स्कूल प्रबंधन ने माता-पिता से साफ शब्दों में कहा है कि अगर बच्चे को सर्दी, खांसी, गले में खराश, हल्का बुखार, बदन दर्द, अत्यधिक थकान या फ्लू जैसे कोई भी मामूली लक्षण नजर आएं, तो उसे बिल्कुल भी स्कूल नहीं भेजा जाना चाहिए।
स्कूल ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार लोग हल्के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्कूल जैसे भीड़भाड़ वाले वातावरण में एक बच्चा अपने क्लासमेट्स और टीचर्स को आसानी से संक्रमित कर सकता है। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।
इसी तरह, रोहिणी स्थित वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल ने भी अपने अभिभावकों को एक विस्तृत एडवाइजरी भेजी है। प्रिंसिपल नमिता सिंघल के मुताबिक, अगर बच्चे में बुखार, नाक बहना, सिरदर्द या सांस लेने में तकलीफ है, तो उसे घर पर आराम करना चाहिए। स्कूल ने यह भी सलाह दी है कि माता-पिता बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को स्कूल वापस न भेजें। बच्चे के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसकी क्लास में एंट्री होनी चाहिए।
दक्षिण दिल्ली स्थित ‘द इंडियन स्कूल’ ने एक कदम और आगे बढ़कर अभिभावकों से पारदर्शिता बरतने की अपील की है। स्कूल ने कहा है कि अगर किसी बच्चे का एच1एन1 का टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो उन्हें तुरंत इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन को देनी चाहिए। इससे स्कूल उस कक्षा या विभाग को सैनिटाइज करवाने और अन्य बच्चों की जांच करवाने जैसे जरूरी कदम उठा सकता है।
अभिभावकों की परेशानी बढ़ी
स्कूलों की यह एडवाइजरी किसी खाली आशंका पर आधारित नहीं है। शहर भर के अभिभावकों के सामने इस समय एक गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। मयूर विहार के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ने वाली 8 वर्षीय बच्ची की मां का कहना है कि उनकी बेटी को लगभग 10 दिनों तक लगातार बुखार रहा। हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें बच्ची को दो दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डेंगू और एच1एन1 के सभी टेस्ट नेगेटिव आने के बावजूद डॉक्टरों ने इसे एक गंभीर वायरल बुखार माना।
इसी तरह, दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) द्वारका में पढ़ने वाली 15 साल की एक छात्रा के पिता महेश मिश्रा ने बताया कि लंबे समय तक बीमार रहने के कारण उनकी बेटी को स्कूल में उसका एक जरूरी टेस्ट छोड़ना पड़ा। यह स्थिति न सिर्फ बच्चों के शैक्षणिक कार्यक्रम को प्रभावित कर रही है, बल्कि माता-पिता के मानसिक और आर्थिक तौर पर भी बोझ बढ़ा रही है।
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन ने दी सलाह
इस पूरे मामले पर दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन भी सक्रिय हो गई है। एसोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट एडवोकेट मनोज कुमार शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि अगर कोई भी विद्यार्थी बीमार है और दो-तीन दिन तक स्कूल नहीं आ पा रहा है, तो उसकी उपस्थिति (अटेंडेंस) से ज्यादा उसकी सेहत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्कूलों को भी इस मामले में अभिभावकों के साथ सहयोग करना चाहिए, न कि अटेंडेंस के नाम पर दबाव बनाना चाहिए।
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
स्कूलों और डॉक्टरों द्वारा दी गई गाइडलाइन के अनुसार, अभिभावकों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- हाइजीन का ध्यान: बच्चों को खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए। जहां पानी उपलब्ध न हो, वहां अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
- चेहरे को न छुएं: बच्चों को समझाएं कि बिना हाथ धोए वे अपनी आंखों, नाक और मुंह को बिल्कुल न छुएं। इससे वायरस शरीर में प्रवेश करता है।
- मास्क का इस्तेमाल: भीड़भाड़ वाली जगहों, बस स्टैंड या मॉल में जाने पर बच्चों और अभिभावकों को मास्क पहनना चाहिए।
- इम्यूनिटी बूस्ट करें: तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन करें, हल्का और पौष्टिक खाना खाएं तथा बच्चों को रात में पूरी नींद दें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।
- सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: अगर बच्चे में लक्षण दिखें, तो खुद से दवाइयां देने के बजाय तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
दिल्ली में एच1एन1 और अन्य वायरल फ्लू का यह दौर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भयभीत होने की जरूरत नहीं है। बशर्ते कि हम सतर्कता बरतें। स्कूलों द्वारा जारी की गई इन एडवाइजरीज को सिर्फ एक औपचारिक सूचना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच सामंजस्य और सहयोग ही इस संक्रमण की चेन को तोड़ने का सबसे प्रभावी हथियार साबित होगा।

























