Delhi News: दिल्ली के ईस्ट सागरपुर इलाके में मुहर्रम के जुलूस के दौरान कथित रूप से लगाए गए एक झंडे को लेकर शुरू हुआ विवाद मंगलवार शाम हिंसक झड़प में बदल गया। झंडे को लेकर दो अलग-अलग दावे किए गए, जिसके बाद मामला लगातार तूल पकड़ता गया। मंगलवार को विरोध स्वरूप आयोजित हनुमान चालीसा पाठ के दौरान दो समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच पथराव की घटना सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया और पूरे इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
जाने कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
पुलिस के अनुसार, विवाद की शुरुआत मुहर्रम के जुलूस के दौरान हुई। आरोप लगाया गया कि जुलूस में हरे रंग का एक झंडा लहराया गया, जिसे कुछ स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी झंडा बताते हुए विरोध दर्ज कराया। इस संबंध में सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हुए, जिसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
हालांकि, जिस पक्ष पर आरोप लगाए गए, उसने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना है कि वह किसी भी तरह का पाकिस्तानी झंडा नहीं था, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा झंडा था, जिस पर चांद और तारा का निशान बना हुआ था। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण विवाद लगातार बढ़ता गया।
शिकायत के बाद कार्रवाई न होने का आरोप
स्थानीय निवासी विपिन नामक व्यक्ति ने सागरपुर थाने में शिकायत दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
इसी नाराजगी के बीच कुछ हिंदू संगठनों ने मंगलवार को ईस्ट सागरपुर की गली नंबर-8 स्थित डीडीए पार्क में हनुमान चालीसा पाठ आयोजित करने का आह्वान किया। आयोजन की जानकारी मिलने के बाद इलाके में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ था।
हनुमान चालीसा पाठ के दौरान बढ़ा तनाव
मंगलवार शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ता और स्थानीय लोग डीडीए पार्क में हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए एकत्र हुए। इसी दौरान पास की झुग्गी बस्ती में रहने वाले कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई, जो बाद में तीखी नोकझोंक में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही देर बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया। आरोप लगाया गया कि झुग्गी बस्ती की कुछ छतों से पत्थर फेंके गए, जिसके बाद दूसरी ओर से भी जवाबी पथराव हुआ। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
पुलिस की तत्परता से टला बड़ा हादसा
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने तत्काल दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया। संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, समय रहते हस्तक्षेप किए जाने के कारण किसी बड़े हादसे को टाल दिया गया। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना दोबारा न हो।
पार्क पर कब्जे का भी उठा मुद्दा
घटना के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस पार्क में हनुमान चालीसा का आयोजन किया गया, वहां लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया है। उनका कहना है कि पार्क में मुर्गियां और बकरियां पाली जा रही हैं, जिससे सार्वजनिक स्थान का उपयोग प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग भी की है।
हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और हिंसा की घटना की निष्पक्ष जांच करना है।
वायरल वीडियो भी जांच के दायरे में
झंडे से जुड़े विवाद और पथराव की घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। पुलिस इन वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ तथा हिंसा के लिए जिम्मेदार लोग कौन हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज, सीसीटीवी कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका हिंसा भड़काने में सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।






















