Delhi News: दिल्ली में अचल संपत्ति के कारोबारियों और भू-माफियाओं के लिए अब राहत भरे दिन लद चुके हैं। दिल्ली सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के दौरान होने वाले बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी को रोकने के लिए एक बेहद सख्त और कारगर नीति को लागू किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशानुसार, अब ‘जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी’ (GPA) के नाम पर होने वाले फर्जी और अवैध संपत्ति ट्रांसफर पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
समझिए GPA के जरिए स्टांप ड्यूटी चोरी का खेल
अक्सर लोगों को लगता है कि जीपीए (GPA) के जरिए प्रॉपर्टी खरीदना आसान और सस्ता तरीका है। लेकिन असलियत में, यह एक बड़ा जाल होता है। जब कोई व्यक्ति संपत्ति बेचता है, तो उसे ‘सेल डीड’ (विक्रय अनुबंध) पर पूरी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है, जो प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का काफी हिस्सा होती है।
भू-माफिया और जालसाज इस ड्यूटी को बचाने के लिए एक नया तरीका अपनाते हैं। वे बिक्री के दस्तावेज को ही ‘जीपीए’ के रूप में ढाल लेते हैं। इस फर्जी जीपीए में ऐसे प्रावधान लिख दिए जाते हैं जिनमें संपत्ति का कब्जा देने, उसे बेचने, गिफ्ट करने या बंधक रखने के पूरे अधिकार दूसरे व्यक्ति को दे दिए जाते हैं। चूंकि यह दस्तावेज नाममात्र की स्टांप ड्यूटी पर रजिस्टर हो जाता है, इसलिए सरकार को भारी नुकसान होता है और खरीदार को भविष्य में अदालती झंझटों का सामना करना पड़ता है।
सब-रजिस्ट्रारों को मिले सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस रैकेट को तोड़ने के लिए दिल्ली के सभी उप-पंजीयन कार्यालयों (Sub-Registrar Offices) को तत्काल प्रभाव से नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं। अब किसी भी जीपीए दस्तावेज को आंख मूंदकर पंजीकृत नहीं किया जाएगा। यदि दस्तावेज में इनमें से कोई भी शर्त या प्रावधान मिलता है, तो यह साफ है कि यह कोई साधारण जीपीए नहीं है, बल्कि यह ‘कन्वेयंस डीड’ (बिक्री पत्र) ही है, जिस पर पूरी स्टांप ड्यूटी लागू होती है।
‘कलेक्टर ऑफ स्टांप’ से मंजूरी
सरकार ने परिवारों को परेशान न हो, इसके लिए एक छूट दी है। अगर जीपीए माता-पिता, पति या पत्नी, पुत्र, पुत्री, भाई या बहन जैसे नजदीकी रिश्तेदारों (ब्लड रिलेशन) के पक्ष में बनाया जा रहा है, तो इसे सामान्य प्रक्रिया में पंजीकृत किया जा सकता है।
लेकिन, यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के बाहर किसी दोस्त, दूर के रिश्तेदार या किसी अज्ञात व्यक्ति के पक्ष में जीपीए बना रहा है, तो नियम कड़े हो जाते हैं। अब कोई भी सब-रजिस्ट्रार ऐसे नॉन-ब्लड रिलेशन GPA को सीधे रजिस्टर नहीं कर सकता। इसे अनिवार्य रूप से ‘कलेक्टर ऑफ स्टांप’ (Collector of Stamps) के पास भेजा जाएगा।
बिना मंजूरी के नहीं होगा रजिस्ट्रेशन
कलेक्टर ऑफ स्टांप के काम को तेज करने के लिए भी समय-सीमा तय की गई है। जब भी कोई संदिग्ध जीपीए उनके पास भेजा जाएगा, तो उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना लिखित आदेश जारी करना होगा। इस आदेश में स्पष्ट लिखा होगा कि दस्तावेज सिर्फ जीपीए है या इसे सेल डीड मानकर पूरी स्टांप ड्यूटी जमा करनी होगी।
बता दें कि बेहद जटिल मामलों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने (90 दिन) तक बढ़ाई जा सकती है। सबसे अहम बात यह है कि जब तक कलेक्टर ऑफ स्टांप अपना आदेश नहीं दे देता और खरीदार पूरा स्टांप शुल्क जमा नहीं करता, तब तक उस संपत्ति के जीपीए का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से निलंबित रहेगा।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज
दिल्ली सरकार ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ (कोई भी छूट नहीं) की नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि अगर किसी भी सब-रजिस्ट्रार ने नियमों की अनदेखी करते हुए, कलेक्टर ऑफ स्टांप को रेफर किए बिना ही किसी तीसरे पक्ष के जीपीए को पंजीकृत कर दिया, तो उसके खिलाफ बड़ी और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक के प्रावधान शामिल हैं।
भ्रष्टाचार और फाइलें गायब होने की संभावना को खत्म करने के लिए, सरकार अब पूरी तरह से डिजिटल हो रही है। मुख्यमंत्री ने सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को आदेश दिए हैं कि उन्हें ऐसे सभी संदिग्ध जीपीए मामलों का एक अलग रजिस्टर बनाना होगा और हर महीने इसकी रिपोर्ट ऊपर भेजनी होगी।
इसके अलावा, सरकार ने एक महीने के भीतर एक ऑनलाइन ट्रैकिंग मैकेनिज्म (Online Tracking Mechanism) विकसित करने पर जोर दिया है। इस सिस्टम के आने के बाद, किसी भी जीपीए दस्तावेज पर किसने, कब और क्या एक्शन लिया, इसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इससे अफसरशाही की लापरवाही पर आसानी से नकेल कसी जा सकेगी।






















