ऋषी तिवारी
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) (Delhi MCD) के कर्मचारियों ने पिछले एक महीने से वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर रखी है। इन कर्मचारियों में मुख्य रूप से डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में कार्यरत 5000 एमटीएस (पीएच)/डीबीसी और सीएफडब्ल्यू कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों का यह आंदोलन सीटू (सीटू दिल्ली एनसीआर राज्य कमेटी) के बैनर तले और कई मजदूर यूनियनों के समर्थन से जंतर मंतर, नई दिल्ली पर जोरदार प्रदर्शन में बदल गया।
Delhi MCD : मांगों का समर्थन और आंदोलन की गंभीरता
एमसीडी (Delhi MCD) प्रदर्शन में सीटू के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें गौतम बुद्ध नगर से मुकेश कुमार राघव, राम स्वारथ, रामसागर, गंगेश्वर दत्त शर्मा सहित अन्य प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीटू के दिल्ली एनसीआर राज्य कमेटी के नेता कामरेड पीवी अनियन, अनुराग सक्सेना, मदन, ज्ञानेंद्र और अन्य यूनियनों के नेता ने बताया कि हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की है। उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और कर्मचारियों की जायज मांगों पर शीघ्र समाधान करने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह मुद्दा सुलझाया नहीं गया तो दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में मजदूर वर्ग बड़े आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
Delhi MCD : कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
सीटू के नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को साझा किया। उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों से दिल्ली की जनता की सेवा में लगे इन स्वास्थ्य योद्धाओं (एमटीएस हेल्थ वॉरियर्स) को एक समान ग्रेड पे और वेरिएबल डीए दिया जाए। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों को मेडिकल लीव, अर्जित अवकाश, और जोखिमपूर्ण कार्यों के मद्देनजर रिस्क अलाउंस जैसे लाभ दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवार के एक सदस्य को करुणामूलक आधार पर नौकरी देने की मांग भी की गई है।
धरने का स्थान और भविष्य के कदम
कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन दिल्ली निगम मुख्यालय सिविल सेंटर में जारी है, और यह बिना किसी विश्राम के चल रहा है। यदि सरकार ने जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला तो कर्मचारियों और उनके समर्थकों ने चेतावनी दी है कि वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को तैयार हैं।
यह आंदोलन न केवल दिल्ली के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है, बल्कि यह एक संकेत है कि मजदूर वर्ग की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सीटू और अन्य मजदूर संगठनों का यह प्रयास दिल्ली निगम के कर्मचारियों को उनके अधिकार दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।





















