Delhi News: दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में आज शुक्रवार को एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसे देख किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। एक भीषण आग ने एक परिवार का सब कुछ लील लिया, लेकिन इस त्रासदी के बीच एक बेटे के हौसले और प्रेम ने सबको हिला कर रख दिया। आग की लपटों में घिरकर अपनी जान बचाने वाले युवा ने अपनी मां और बहन को बचाने के लिए मौत को दोबारा गले लगा लिया। यह कहानी है 28 वर्षीय पंकज की, जिसने सुरक्षित होने के बाद भी अपने परिवार की चिंता में आग में वापस कूदकर अमर हो जाने वाला प्रेम साबित किया।
सुबह की शांति को बनाया भस्म
घटना शुक्रवार तड़के की है, जब पूरा इलाका गहरी नींद में था। अचानक गोविंदपुरी स्थित एक पांच मंजिला इमारत में आग की लपटें उठनी शुरू हो गईं। सुबह का वक्त होने के कारण इमारत में सन्नाटा पसरा था, लेकिन अगले ही पल यह सन्नाटा चीख-पुकार में बदल गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और मदद की गुहार लगाने लगे। पुलिस को सूचना सुबह 2 बजकर 31 मिनट पर मिली, लेकिन तब तक आग ने विकराल रूप ले लिया था।
मौत से खेलकर लौटा वीर
इस आग में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जिनकी पहचान पंकज (28), उनकी मां गुड्डी (50) और बहन सोनी (20) के रूप में हुई है। ये तीनों इमारत की तीसरी मंजिल पर रहते थे। शुरुआत में पंकज को किसी तरह पड़ोसियों की मदद से इमारत से बाहर निकाल लिया गया था। वह ग्राउंड फ्लोर पर मिला, जहां उसकी हालत बेहोशी जैसी थी। पड़ोसियों ने उसे कंधे पर उठाकर बाहर लाया।
एक चश्मदीद और पड़ोसी सौरभ शर्मा ने बताया कि जब हम पंकज को बाहर ला रहे थे, तो वह बार-बार अपने परिवार के बारे में पूछ रहा था। उसे न अपनी सुरक्षा की परवाह थी और न ही अपनी जान की।” सौरभ ने आगे बताया कि पंकज ने जो किया, वह कोई आम इंसान शायद ही सोच सके। जैसे ही उसे होश आया और उसने अपने परिवार को आग की लपटों के बीच फंसा हुआ देखा, उसने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत खुद को आग में झोंक दिया।
प्रेम बना मौत की वजह
पंकज दोबारा इमारत के अंदर घुस गया। वह दूसरी मंजिल तक पहुंचने में कामयाब हो गया, लेकिन वहां घने धुएं और जहरीली गैसों ने उसे घेर लिया। सांस धीमी होने लगी और दम घुटने से वह वहीं बेहोश हो गया। जब दमकल कर्मी उसे पहुंचे, तो उन्हें वहीं उसके शव को बरामद करना पड़ा। परिवार की खोज में उसने जो कदम उठाया, उसने उसकी जान छीन ली। उसने अपनी मां और बहन को बचाने के लिए अपनी जान का दांव खेला, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
पड़ोसियों ने दिखाई अदभुत इंसानियत
इस आपदा में पड़ोसियों की भूमिका भी काबिले तारीफ रही। पड़ोस में रहने वाली रेनू भूटानी और उनके बेटे ने बेहद सूझ-बूझ से काम लिया। रेनू ने बताया, “आग लगने के बाद हमें धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। हम तुरंत मदद के लिए पिछले हिस्से की ओर भागे। छत का दरवाजा आग की गर्मी के कारण इतना गर्म था कि उसे छूना भी मुश्किल था।”
रेनू और उनके बेटे ने एक चार मंजिला अन्य इमारत की छत का सहारा लिया। उन्होंने आग से जलती इमारत की छत पर लकड़ी की सीढ़ी लटकाई और वहां पहुंच गए। वहां उन्होंने एक बड़ी चतुराई दिखाते हुए पानी की टंकी की पाइपलाइन को तोड़ दिया। टूटी पाइप से निकलते पानी की बौछार से उन्होंने छत के गर्म गेट को ठंडा किया और खोला। इसके बाद उन्होंने बाल्टियों से पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की और दूसरी मंजिल पर फंसे लोगों को बचाया।
इमारत का नजारा बना मुश्किल
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इमारत में करीब 9 परिवार रहते हैं। हालांकि, छुट्टियों के चलते कई लोग बाहर थे, जिसकी वजह से हताहतों की संख्या और अधिक नहीं हुई। लेकिन जो नुकसान हुआ है, वह पूरी तरह से एक परिवार को तोड़ देने वाला है। पंकज की इस बहादुरी ने उसे जिंदा नहीं रख पाया, लेकिन उसने एक बेटे और भाई के रूप में अपने फर्ज को अंतिम सांस तक निभाया। आज पूरा इलाका उस शख्स की कहानी सुनकर स्तब्ध है, जिसने अपनी जान तो गंवाई लेकिन परिवार के प्रति प्रेम हार नहीं माना।






















