Delhi News: दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में आयोजित CDE-IEDS अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय आर्थिक विकास, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच मौजूद गहरे संबंधों को समझना तथा भविष्य की चुनौतियों के समाधान तलाशना रहा। इस अवसर पर देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और छात्रों ने भाग लिया।
अपने उद्घाटन भाषण में उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि आज दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहाँ आर्थिक प्रगति, बढ़ती जनसंख्या और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखना है, तो दीर्घकालिक और समावेशी नीतियों को अपनाना होगा।
Delhi News: भारत के लिए अवसर और चुनौती
उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत वर्तमान समय में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है और इसकी जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक है। इतनी बड़ी आबादी अपने साथ अवसर और चुनौतियाँ दोनों लेकर आती है।
Addressed the CDE-IEDS International Conference at Delhi School of Economics today on the vital interplay between economic development, demographic transition, and environmental sustainability.
Guided by Hon’ble PM Shri @narendramodi Ji’s vision that development and… pic.twitter.com/mHy83VP7gj
— LG Delhi (@LtGovDelhi) June 3, 2026
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, जो देश के आर्थिक विकास की आधारशिला बन सकती है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि युवा शक्ति को सही दिशा और संसाधन मिलें, तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन के साथ तेजी से बढ़ता शहरीकरण, संसाधनों पर दबाव और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएँ भी सामने आती हैं। इसलिए सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत को मिलकर ऐसी रणनीतियाँ विकसित करनी होंगी जो समावेशी विकास को बढ़ावा दें और समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करें।
Delhi News: पर्यावरणीय स्थिरता के बिना विकास अधूरा
अपने संबोधन में उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक वृद्धि ही किसी राष्ट्र की सफलता का पैमाना नहीं हो सकती। यदि विकास की कीमत पर्यावरणीय क्षति के रूप में चुकानी पड़े, तो उसका लाभ लंबे समय तक नहीं टिक सकता।
उन्होंने कहा कि आज भारत सहित पूरी दुनिया वायु प्रदूषण, जल संकट, जैव विविधता में कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।
उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा को अपनाते हुए हमें ऐसी नीतियाँ बनानी होंगी जो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दें। उन्होंने यह भी कहा कि हरित विकास मॉडल ही भविष्य की जरूरत है और भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
Delhi News: तकनीकी नवाचार और स्मार्ट शहरों की आवश्यकता
भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि आने वाले वर्षों में शहर आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनेंगे। ऐसे में शहरी विकास को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ, डिजिटल तकनीकों का उपयोग, ऊर्जा दक्ष भवन, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर शहरों को अधिक स्वच्छ और रहने योग्य बनाया जा सकता है।
उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि तकनीकी नवाचार केवल आर्थिक विकास को गति नहीं देता, बल्कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने छात्रों और शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने में योगदान दें।
Delhi News: नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश की जरूरत
अपने भाषण में उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत बनाती है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से भारत वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करके और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
Delhi News: वैश्विक सहयोग और युवाओं की भूमिका
सम्मेलन में उपस्थित विद्वानों, शिक्षकों और छात्रों को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियाँ किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे मुद्दों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक साझेदारी को मजबूत करते हुए अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही युवाओं को जागरूक, जिम्मेदार और नवाचारी सोच के साथ आगे आना होगा।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के हाथों में है। यदि युवा आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति सजग रहेंगे, तो देश विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को तेजी से प्राप्त कर सकेगा।
CDE-IEDS अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने आर्थिक विकास, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद का मंच प्रदान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सम्मेलन नीति निर्माण, शोध और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे भारत के सतत और समावेशी विकास का मार्ग और अधिक मजबूत होगा।





















