Delhi News: दिल्ली में एक छात्र की जिंदगी उस समय खतरे में आ गई जब उसने अपने रियलमी एक्सटी’ मोबाइल फोन को सिरहाने रखा था और वह अचानक फट गया। इस हादसे में छात्र की सालभर की मेहनत और सपने बर्बाद हो गए। इस घटना ने मोबाइल सुरक्षा और कंपनियों की जिम्मेदारी पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। करीब साढ़े तीन साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आयोग ने मोबाइल कंपनी रियलमी (Realme) को सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी ठहराते हुए छात्र को 1.50 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश दिया है।
मध्य जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मोबाइल की बैटरी में धमाका होना उपभोक्ताओं की सुरक्षा का एक गंभीर मुद्दा है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान भी हो सकता था।
पूरा मामला क्या है?
मामला दिल्ली के यूपीएससी कोचिंग हब ओल्ड राजेंद्र नगर का है। पीड़ित छात्र कोटी साईं पवन ने साल 2019 में लगभग 18 हजार रुपये में ‘रियलमी एक्सटी’ (Realme XT) स्मार्टफोन खरीदा था। 5 जून 2022 को यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा थी। इससे ठीक एक दिन पहले, 4 जून की तड़के सुबह तीन बजे अचानक सिरहाने रखा फोन फट गया और आग पकड़ ली। इस हादसे में पवन के हाथ, माथे और उंगलियां गंभीर रूप से झुलस गईं।
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इलाज के लिए तत्काल अस्पताल पहुंचने के कारण पवन अगले दिन होने वाली परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। आयोग को दिए बयान में पवन ने बताया कि इस हादसे ने न सिर्फ उसकी एक साल की कठिन तैयारी पर पानी फेर दिया, बल्कि उसके करियर को भी एक साल पीछे धकेल दिया। उसने बताया कि उसके पिता की जीवन भर की जमा-पूंजी से कोचिंग की फीस भरी गई थी, जो इस लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
कंपनी ने बचने के लिए लगाई अड़चनें
आयोग के आदेश के अनुसार, हादसे के बाद जब पवन कंपनी के सर्विस सेंटर पहुंचा, तो वहां उसके साथ बदसलूकी की गई। फोन ठीक करने के बदले कंपनी के कर्मचारियों ने उसे एक ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया, जिसमें धमाके की पूरी जिम्मेदारी खुद छात्र पर डाल दी गई थी। पवन के इनकार करने पर उसे अपमानित किया गया और उसका फोन भी लौटाने से मना कर दिया गया। आयोग ने कंपनी के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर कड़ी फटकार लगाई।
आयोग ने सुनाया यह फैसला
पीड़ित छात्र ने शारीरिक, मानसिक कष्ट और करियर के नुकसान को देखते हुए आयोग ने रियलमी मोबाइल टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी पर यह जुर्माना लगाया है:
- शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में: 1 लाख रुपये
- हर्जाने के तौर पर: 25 हजार रुपये
- कानूनी खर्च के लिए: 25 हजार रुपये
आयोग ने साफ निर्देश दिए हैं कि यह पूरी राशि एक अक्टूबर 2022 (जब मामला दायर हुआ था) से 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ दी जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर यह भुगतान नहीं करती है, तो ब्याज की दर बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी जाएगी।






















