Delhi News: दिल्ली में मॉनसून का कहर इस बार कुछ ज्यादा ही भयावह रूप ले रहा है। पिछले 48 घंटों से रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर की तस्वीर ही बदल दी है। इसी बीच, आज बुधवार देर दोपहर रोहिणी सेक्टर-16 में एक दिल दहला देने वाला हादसा पेश आया। यहां एक निर्माणाधीन पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर धराशायी हो गई। हादसा इतना तेज और भयंकर था कि आसपास के लोगों को समझ ही नहीं आया कि क्या हो गया। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
कैसे घटी घटना और क्या था स्थान?
दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर एके मालिक ने बताया कि पूरा मामला रोहिणी सेक्टर-16 स्थित एमसीडी स्कूल के पास का है। यह इमारत मकान संख्या 16 जी-5 के सामने बन रही थी। शाम करीब 4 बजकर 19 मिनट पर फायर सर्विस की कंट्रोल रूम में इमारत गिरने की एक एमरजेंसी कॉल आई। जैसे ही यह सूचना मिली, विभाग तुरंत एक्शन में आ गया और मिनटों के अंदर राहत एवं बचाव अभियान को अंजाम देने के लिए टीमें रवाना की गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया खौफनाक मंजर
घटना के समय मौजूद लोगों के अनुसार, इमारत गिरते वक्त इतनी तेज आवाज आई कि एक बड़े धमाके से कम नहीं लग रही थी। इस धमाकेदार आवाज के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही पलों में वह पांच मंजिला संरचना एक मस्तूल (मलबे) में तब्दील हो गई। इमारत के ढहने का असर इतना जबरदस्त था कि आसपास खड़ी कई कारें और बाइकें इसकी चपेट में आ गईं और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
सूचना मिलने पर दिल्ली फायर सर्विस ने शुरुआती दौर में 5 वाहनों को रवाना किया। इसमें एक वाटर टेंडर, दो वाटर बाउजर, एक मल्टीपर्पज वाहन और एक इंसीडेंट रिस्पांस टीम शामिल थी। इस ऑपरेशन को एडीओ पारस और एसटीओ विशाल के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है।
फायर विभाग के साथ-साथ दिल्ली पुलिस, नगर निगम (MCD), दिल्ली स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) और अन्य राहत एजेंसियां भी मौके पर पहुंच गई हैं। सभी विभाग एक सामंजस्य के साथ काम कर रहे हैं। राहत कार्य को गति देने के लिए भारी मशीनों (जैसे- क्रेन, जेसीबी) के साथ-साथ मैन्युअल तरीके से भी मलबा हटाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अगर कोई व्यक्ति नीचे फंसा हो, तो भारी मशीनों से उसे और नुकसान न पहुंचे। स्थानीय लोग भी प्रशासन का भरपूर सहयोग कर रहे हैं।
एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें मैदान में उतरीं
भारी मलबे और लोगों के फंसने की बढ़ती आशंका को देखते हुए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) को भी तुरंत बुलाया गया। एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट राजेश ने बताया कि स्थानीय प्रशासन के रिक्वेस्ट पर दो टीमें तुरंत मौके के लिए रवाना की गईं। एनडीआरएफ के जवानों के पास अत्याधुनिक उपकरण मौजूद हैं, जिनमें कंक्रीट कटर, लाइफ डिटेक्टर और थर्मल इमेजिंग कैमरे शामिल हैं। ये टूल्स मलबे के अंदर मौजूद जीवन संकेतों को पकड़ने और भारी बल्कों को काटने में बेहद कारगर साबित होते हैं।
हादसे के बाद सबसे बड़ी जरूरत थी मेडिकल सपोर्ट की। इसे ध्यान में रखते हुए आसपास के अस्पतालों और निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस को घटनास्थल पर तैनात कर दिया गया है। ताकि, जैसे ही कोई भी व्यक्ति मलबे से बाहर निकाला जाए, उसे ‘गोल्डन आवर’ के दौरान ही अस्पताल पहुंचाया जा सके।
वहीं, इमारत ढहने से रोहिणी सेक्टर-16 के आसपास के इलाके में भारी ट्रैफिक जाम लग गया है। ट्रैफिक पुलिस और सिविल डिफेंस के जवानों ने मिलकर रूट को डायवर्ट किया है। रेस्क्यू वाहनों के लिए एक विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया गया है, ताकि राहत सामग्री और एम्बुलेंस को बिना किसी रुकावट के आवाजाही करने की जगह मिल सके। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है ताकि भीड़ रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा न बने।
अब तक कोई जानहानि की पुष्टि नहीं
हालांकि, मलबे में लोगों के दबे होने की बहुत ज्यादा आशंका जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल प्रशासन की तरफ से किसी भी तरह की जानहानि या घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे की पूरी तरह से सफाई और तलाशी लेने के बाद ही असल हालात सामने आ सकते हैं।
इमारत गिरने के पीछे के असल कारणों की जांच की जाएगी। शुरुआती जांच में लगातार हो रही बारिश के कारण मिट्टी के कमजोर होने और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इस हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में जर्जर और निर्माणाधीन इमारतों का तत्काल ऑडिट कराएं। मौजूदा मौसम को देखते हुए ऐसी इमारतों के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा सकता है, ताकि रोहिणी जैसा कोई और त्रासदिक हादसा न दोहराया जा सके।






















