Delhi News: दिल्ली के महरौली इलाके में आज गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां एक कथित रूप से जर्जर तीन मंजिला इमारत को गिराने के दौरान तैनात जेसीबी मशीन का संतुलन बिगड़ गया, जिसके बाद इमारत की एक बड़ी दीवार अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। दीवार के गिरते ही भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा और आसमान में धूल का गुबार उठ गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस ने तत्काल इलाके को घेर लिया और राहत तथा जांच कार्य शुरू कर दिया। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
पूरी घटना कैसे घटी?
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला आज गुरुवार सुबह करीब 8 बजे का है। महरौली स्थित यह तीन मंजिला इमारत काफी समय से जर्जर हालत में थी और इसे खतरनाक मानते हुए इसे गिराने का निर्णय लिया गया था। बुधवार से ही इस इमारत के बड़े हिस्से को तोड़ा जा चुका था और गुरुवार सुबह बचे हुए हिस्से को जेसीबी मशीन की मदद से ध्वस्त किया जा रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही जेसीबी ऑपरेटर ने इमारत के एक खंडहरीय हिस्से पर जोरदार दबाव बनाया, तभी अचानक एक बड़ी दीवार अपने अक्ष से भटक गई। इमारत की संरचना पहले से ही कमजोर हो चुकी थी, जिस कारण दबाव बढ़ते ही पूरी दीवार ने संतुलन खो दिया और वह भारी शोर के साथ नीचे आ गिरी।
दहशत और अफरा-तफरी का माहौल
दीवार गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाके में गूंज गई। लोगों का कहना है कि एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे कोई बड़ा विस्फोट हो गया हो। दीवार के गिरते ही ईंट-पत्थर और सीमेंट का भारी मलबा बगल में मौजूद एक खाली प्लॉट की तरफ गिरा, लेकिन उसकी रफ्तार इतनी तेज थी कि मलबे का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर तक आ गिरा। इस दौरान उड़ी धूल का गुबार इतना भारी था कि आसपास की दूधिया सफेद चादर छा गई और कुछ देर तक कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
सड़क पर आए मलबे के कारण इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुबह के समय लोग अपने रोजमर्रा के कामों के लिए निकल रहे थे, लेकिन हादसे के बाद लोगों ने वहां से जान बचाकर भागना शुरू कर दिया। कुछ समय के लिए इस रूट पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई और लंबी ट्रैफिक जाम लगने लगी।
पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
हादसे की आवाज सुनकर आसपास के स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने हालात का जायजा लिया और जब यह स्पष्ट हुआ कि कोई घायल नहीं हुआ, तब उन्होंने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीम, स्थानीय थाना प्रभारी और ट्रैफिक पुलिस का दस्ता मौके पर पहुंच गया।
पुलिस ने सबसे पहले पूरे इलाके को बैरिकेडिंग लगाकर सील कर दिया, ताकि कोई भी आम नागरिक मलबे के पास न जा सके। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने मलबे के नीचे किसी व्यक्ति या जानवर के दबे होने की संभावना को खारिज करने के लिए गहनता से निरीक्षण किया। शुरुआती जांच और मौके मौजूद लोगों की गवाही से यह पुष्टि हो गई कि इस हादसे में कोई भी घायल नहीं हुआ है।
सड़क को साफ करने का अभियान
यातायात को सामान्य करने के लिए पुलिस ने तत्काल नगर निगम (MCD) के अधिकारियों और जेसीबी मशीन ऑपरेटरों को बुलाया। कुछ ही देर में मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया। भारी मशीनों और मजदूरों के अथक प्रयास से कुछ ही घंटों के भीतर सड़क पर बिखरा मलबा पूरी तरह से साफ कर लिया गया। सड़क साफ होने के बाद पुलिस ने बैरिकेड्स हटाए और यातायात को बहाल कर दिया गया।
दिल्ली में जर्जर इमारतों का बढ़ता खतरा
यह घटना एक बार फिर दिल्ली में बढ़ते जर्जर और अवैध निर्माणों के खतरे को उजागर करती है। महरौली जैसे पुराने इलाकों में कई इमारतें दशकों से खड़ी हैं और बारिश के मौसम में ये और भी कमजोर हो जाती हैं। नगर निगम और शासन प्रशासन को चाहिए कि वे ऐसी इमारतों की सूची तैयार करें और इन्हें गिराने का काम पूरी तरह से पेशेवर एजेंसियों के माध्यम से, सख्त सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करवाकर ही करवाएं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों। फिलहाल, इस हादसे ने आसपास के लोगों के बीच एक डर का माहौल बना दिया है और लोगों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।






















