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जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का कहर, छात्रों को पीटा

Delhi News: पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने आंदोलन स्थल पर मौजूद एक अस्थायी पुस्तकालय (लाइब्रेरी) को अचानक हटाना शुरू कर दिया। यह लाइब्रेरी कुछ समर्पित छात्रों द्वारा उन लोगों के लिए बनाई गई थी, जो जंतर-मंतर पर आकर इस धरने का हिस्सा बन रहे थे।

दिल्ली पुलिस का शर्मनाक कृत्य, ज्ञान की किताबें फेंकीं

HIGHLIGHTS

  • शिवाजी-भगत सिंह की किताबें फेंकी, पुलिस पर हमला
  • दिल्ली पुलिस ने फेंकी महापुरुषों की किताबें, मचा बवाल
  • पुलिस ने तोड़ी लाइब्रेरी, छात्र से की जमकर मारपीट
  • वर्दी उतारो और भाजपा ज्वाइन करो, पुलिस को चुनौती
  • जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज, किताबें बनीं कचरा

Delhi News: दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर में चल रहा काकरोच जनता पार्टी (CJP) का जन आंदोलन गुरुवार को एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। प्रदर्शन के 13वें दिन आंदोलन स्थल पर ऐसा माहौल बन गया जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर तीखी बहस और नोक-झोंक हुई। इस बवाल की वजह बनी कुछ ऐसी घटनाएं, जिन्होंने पूरे आंदोलन के स्वरूप को ही बदल दिया। काकरोच जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने न सिर्फ छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि देश के वीरों और महापुरुषों की ऐतिहासिक किताबों को कचरे की तरह जमीन पर फेंक दिया।

आंदोलन स्थल पर ‘ज्ञान के केंद्र’ को बनाया निशाना

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने आंदोलन स्थल पर मौजूद एक अस्थायी पुस्तकालय (लाइब्रेरी) को अचानक हटाना शुरू कर दिया। यह लाइब्रेरी कुछ समर्पित छात्रों द्वारा उन लोगों के लिए बनाई गई थी, जो जंतर-मंतर पर आकर इस धरने का हिस्सा बन रहे थे। इस छोटे से स्टॉल पर महान इतिहासिक व्यक्तित्वों और स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित किताबें रखी गई थीं, ताकि लोग अपना समय पढ़ाई में भी व्यतीत कर सकें।

लेकिन, पुलिस को जैसे ही यह व्यवस्था नागवार गुजरी, उन्होंने उस टेबल को हटाने की कोशिश की। इस दौरान वहां मौजूद छात्रों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद हालात बिगड़ गए और आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने छात्रों पर अपना हाथ उठाया।

पीड़ित छात्र का मंच पर भावुक बयान

झड़प के तुरंत बाद, जिस युवक के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट हुई, वह सीधा मुख्य मंच पर जा पहुंचा। वहां उसने आंदोलन के मुखिया अभिजीत दीपके के सामने पूरी घटना को बयां किया। उस युवक की आंखों में गुस्सा और दर्द दोनों साफ दिख रहा था। उसने बताया कि उसका काम सिर्फ लोगों को किताबें उपलब्ध कराना था, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी वजह की टेबल पर पड़ी किताबों को बेरहमी से उठाकर दूर फेंक दिया। जब उसने इस बर्बरता का विरोध किया, तो उसे धकेला और पीटा गया।

अभिजीत दीपके का पुलिस पर तीखा हमला

मंच से इस पूरे घटनाक्रम को सुन रहे काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दीपके ने एसीपी और उनकी टीम पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ये अधिकारी शायद भूल चुके हैं कि आज वे जिस पद पर बैठे हैं, वह उन्हें किसी राजनीतिक दल की सदस्यता की वजह से नहीं, बल्कि इन्हीं किताबों को पढ़कर, परीक्षा देकर और अपनी मेहनत से हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि जो पुलिस अधिकारी आज सरेआम ज्ञान का प्रतीक माने जाने वाली किताबों को फेंक रहे हैं, वे शिक्षा के महत्व का ही अपमान कर रहे हैं।

शिवाजी महाराज और भगत सिंह के अपमान पर भड़का आक्रोश

इस मामले को सबसे ज्यादा नाजुक और आग लगाने वाला बनाया उन किताबों की पहचान ने। आरोप है कि जिन किताबों को पुलिस ने जमीन पर फेंका, उनमें छत्रपति शिवाजी महाराज और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जैसी महान विभूतियों की जीवनियां और उनके विचार थे।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के जरिए इस घटना का वीडियो और जानकारी साझा करते हुए कहा कि दिल्ली की धरती पर छत्रपति शिवाजी महाराज और भगत सिंह जैसे देशभक्तों का यह अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग इन महापुरुषों की किताबों को अपमानित कर सकते हैं, वे देश की जनता से कोई सम्मान की उम्मीद नहीं कर सकते।

महाराष्ट्र के शीर्ष नेताओं से की गई हस्तक्षेप की अपील

इस अपमान को लेकर अभिजीत दीपके ने राजनीतिक गलियारों में भी तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और वरिष्ठ नेता सुनेत्रा पवार को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए एक कड़ा संदेश दिया।

दीपके ने पूछा, “क्या महाराष्ट्र के आराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति आपका यही सम्मान है? जब दिल्ली पुलिस आपके आदर्शों की किताबों को कचरे में फेंक रही है, तो आप चुप क्यों हैं?” उन्होंने इन नेताओं से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी। साथ ही, उन्होंने दिल्ली पुलिस प्रशासन से उस एसीपी को तत्काल निलंबित (सस्पेंड) करने की कड़ी मांग उठाई, जिसकी अगुवाई में यह पूरा अतार्किक कदम उठाया गया।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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