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दिल्ली जंतर-मंतर में सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुरू

Delhi News: सोनम वांगचुक, जो कि एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उन्होने आज रविवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दिया है। उनका यह कदम शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है।

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली पुलिस ने पानी और साफ-सफाई बंद की
  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा
  • CJP ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए
  • सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन
  • सरकार से परीक्षा में पारदर्शिता की मांग

Delhi News: दिल्ली जंतर-मंतर आठ दिनों से धरना प्रदर्शन आ तूल पकड़ लिया है। बता दें कि युवा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिसका मकसद केंद्र सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाना है। इस भूख हड़ताल का मकसद शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और छात्रों के भविष्य के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करना है। इस संदर्भ में, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे इस पूरे प्रकरण में और भी विवाद खड़ा कर दिया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

सोनम वांगचुक, जो कि एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उन्होने आज रविवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दिया है। उनका यह कदम शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है। उन्होंने यह अनशन इसलिए शुरू किया ताकि सरकार और संबंधित विभागों का ध्यान इन मुद्दों की ओर खींचा जा सके।

आवश्यक कदम उठाए जाएं। वांगचुक की इस भूख हड़ताल को समर्थन देने के लिए सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जमा हुए हैं, जिनमें किसान नेता और युवा छात्र भी शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान, वांगचुक ने कहा कि उनका यह आंदोलन केवल एक परीक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ है।

परीक्षा में अनियमितताओं का मामला और सरकार का रवैया

बता दें कि सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले कुछ दिनों से परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की टीम ने परीक्षा के दौरान गड़बड़ियों को छिपाने और छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास किया है। इन आरोपों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से विरोध प्रदर्शन शुरू किया है और सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना पारदर्शिता के परीक्षा प्रक्रिया में विश्वसनीयता नहीं रह जाती है, और इससे छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और बुनियादी सुविधाओं का बंद होना

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान, इस मुद्दे ने और भी तूल पकड़ लिया है। संयुक्त रूप से, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर पानी और साफ-सफाई की सुविधाएं बंद कर दी हैं। उनका दावा है कि यह कार्रवाई प्रदर्शनकारियों को असुविधा में डालने और उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के मकसद से की गई है। दिपके ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि अधिकारियों से बार-बार गुजारिश करने के बावजूद, पुलिस ने साफ-सफाई और पानी की सुविधा बंद कर दी है। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि यदि इस तरह से बुनियादी सुविधाओं को बंद किया जाएगा, तो आगे और भी जरूरी सुविधाएं बंद की जा सकती हैं, जो प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उल्लंघन है।

पुलिस का रवैया और प्रदर्शनकारियों का संकल्प

अभिजीत दिपके का यह भी आरोप है कि पुलिस का यह रवैया प्रदर्शनकारियों को दबाने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शनकारी अपनी बात कहने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का प्रयास कर रहे हैं, तो पुलिस द्वारा ऐसी कार्रवाई से उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन स्थल पर पानी की आपूर्ति और साफ-सफाई की सुविधाएं बंद होने की वजह से प्रदर्शनकारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में, उनका सवाल है कि क्या सरकार और पुलिस ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान कर रही है या नहीं।

महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि और आंदोलन की शुरुआत

भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह प्रतीकात्मक कदम इस बात को दर्शाता है कि उनका आंदोलन गांधीजी के अहिंसा और सत्याग्रह के आदर्शों से प्रेरित है। गांधीजी ने अपने जीवन में सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाकर देश को आजादी दिलाई थी, और सोनम वांगचुक का यह आंदोलन भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

यह मामला न केवल एक छात्र आंदोलन का प्रतीक है, बल्कि यह राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की भी ओर संकेत करता है। यह आंदोलन युवाओं में जागरूकता और जिम्मेदारी का जागरण कर रहा है कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। साथ ही, सरकार और संबंधित विभागों को भी यह समझने की जरूरत है कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है। यदि बुनियादी सुविधाएं बंद की जाती हैं और उनकी आवाज दबाई जाती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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