Delhi News: दिल्ली जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन लगातार 11वें दिन भी जारी है। यह आंदोलन शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े ज्वलंत मुद्दों, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकार को गंभीरता से इन मुद्दों पर कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि देश के भविष्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल
बता दें कि इस प्रदर्शन के तहत पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। वह पिछले तीन दिनों से केवल पानी और नमक पर रहकर अपने आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं। नियमित रूप से डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं, जिसमें पता चला है कि उनके ब्लड शुगर का स्तर घटकर 66 पहुंच गया है, जो सामान्य से नीचे है। लगातार उपवास के कारण उनका स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि सोनम वांगचुक की स्थिति गंभीर हो सकती है यदि उनका स्वास्थ्य और अधिक बिगड़ता है। डॉक्टर उनके नाड़ी, ब्लड प्रेशर और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य संकेतकों पर नजर रख रहे हैं। यदि स्वास्थ्य और अधिक खराब होता है, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, जिससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है। पार्टी के नेताओं ने जनता से अपील की है कि वह उनके समर्थन में खड़े हों और सरकार से इन मुद्दों पर जल्द कदम उठाने की मांग करें।
आंदोलन की शुरुआत और अब तक की स्थिति
बता दें कि जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में भारी संख्या में छात्र, शिक्षक, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। सुबह से ही प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर अपने समर्थन का इजहार कर रहे हैं। शांतिपूर्ण तरीके से किए जा रहे इस प्रदर्शन में लोग अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं और सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, सरकारी भर्तियों में ईमानदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं।
मौजूदा समय में, देश के विभिन्न राज्यों से लोग लगातार इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे हैं। छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हो रहे हैं। कुछ समर्थक एक दिन का सांकेतिक उपवास रखकर अपने समर्थन का इजहार कर रहे हैं, जबकि कई प्रदर्शनकारी कई दिनों से धरने पर डटे हुए हैं।
आंदोलन का यह स्वरूप यह दर्शाता है कि शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दे अब पूरे देश की चिंता का विषय बन चुके हैं। लोगों का मानना है कि यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करेगी, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। जनता की जनभागीदारी और समर्थन से सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, ताकि वह आवश्यक कदम उठाए।





















