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जंतर-मंतर का 10वां दिन: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जारी

Delhi News: सोनम वांगचुक दो दिनों से अनशन कर रहे हैं। उन्होंने देशभर के नागरिकों से अपील की है कि वे उनके इस संघर्ष में भाग लें। उनका कहना है कि यदि लोग दिल्ली नहीं आ सकते, तो अपने घरों में एक दिन का सांकेतिक अनशन कर सकते हैं। इससे आंदोलन को मजबूत और व्यापक बनाने में मदद मिलेगी।

जंतर-मंतर पर जुट रहे समर्थन और भीड़

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली में आंदोलन के 10 दिन
  • सामाजिक संगठनों की भागीदारी
  • सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग
  • सोनम वांगचुक का अनशन जारी
  • शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता सवाल

Delhi News: दिल्ली जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन का आज सोमवार दसवां दिन है। यह आंदोलन शिक्षा सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है। इसके साथ ही, लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का दूसरा दिन है, जो देशभर में एक जागरूकता का संदेश दे रहा है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

जंतर-मंतर का दसवां दिन

बता दें कि जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन ने अब अपने दसवें दिन में प्रवेश कर लिया है। युवाओं, छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की भारी भीड़ यहां जुट रही है। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक जैसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई, जवाबदेही तय करने और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर हो रहा है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक सरकार या एक मंत्री के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के भविष्य के लिए है। शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही को दूर करने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा का स्तर सुधर सके और युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है, क्योंकि यह हमारे आने वाले पीढ़ियों का जीवन और कल्याण सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल

लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन का हिस्सा बनते हुए जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की है। यह भूख हड़ताल केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़े आंदोलन का प्रतीक है। सोनम वांगचुक ने कहा है कि यह अनशन शिक्षा और पर्यावरण के साथ-साथ लद्दाख के समर्थन में है।

सोनम वांगचुक नमक और पानी के सहारे लगभग दो दिनों से अनशन कर रहे हैं। उन्होंने देशभर के नागरिकों से अपील की है कि वे उनके इस संघर्ष में भाग लें। उनका कहना है कि यदि लोग दिल्ली नहीं आ सकते, तो अपने घरों में एक दिन का सांकेतिक अनशन कर सकते हैं। इससे आंदोलन को मजबूत और व्यापक बनाने में मदद मिलेगी।

सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि यह केवल दिल्ली का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के भविष्य से जुड़ा है। यदि समाज के हर वर्ग और हर नागरिक इस आंदोलन का हिस्सा बनें, तो बदलाव संभव है। उनका प्रयास है कि युवा और आम नागरिक जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं और सरकार को जवाबदेह बनाएं।

शिक्षा सुधार और जवाबदेही

सोनम वांगचुक ने अपने भाषण में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उनका मानना है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है, और यह तभी मजबूत हो सकता है जब शिक्षा प्रणाली पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण हो।

उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना चाहिए। जवाबदेही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। जब तक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक विकास का सपना अधूरा रहेगा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वह भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई करे और छात्रों को भ्रष्टाचार से मुक्त शिक्षा प्रणाली दे।

समर्थन में जुटे लोग और आंदोलन

बता दें कि जंतर-मंतर पर इस आंदोलन में छात्र, युवा, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि लगातार पहुंच रहे हैं। वे शिक्षा सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण की मांग उठा रहे हैं।

आंदोलनकारी सरकार से इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना समाज की भागीदारी और जागरूकता के बदलाव संभव नहीं है। इसलिए, हर नागरिक को अपने स्तर पर इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए।

युवाओं की भागीदारी और देश का भविष्य

सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि पूरा भारत शिक्षा, पर्यावरण और जवाबदेही जैसे बुनियादी मुद्दों पर एकजुट होकर आगे आए, तो निश्चित रूप से देश में सकारात्मक बदलाव संभव है। युवा शक्ति इस आंदोलन का आधार है, और उनकी भागीदारी से ही बदलाव संभव है।

उन्होंने युवाओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाएं, सरकार पर दबाव बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयासरत रहें। उनका संदेश है कि समाज में बदलाव तभी आएगा जब हम सब जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाएंगे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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