Delhi News: दिल्ली सरकार ने राजधानी के लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने घोषणा की है कि अब दिल्ली के निवासियों को घरेलू जरूरतों के लिए निजी बोरवेल लगाने के लिए जल बोर्ड से आसान शर्तों पर अनुमति मिलेगी। इस कदम से लोगों को विभिन्न विभागों द्वारा होने वाली हड़ताली वसूली और नोटिस से बचाव मिलेगा।
विधानसभा में पेश किया बड़ा ऐलान
दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को सदन में दिल्ली जल बोर्ड की कैग (CAG) रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि अक्सर लोगों को निजी बोरवेल लगवाने पर अलग-अलग विभागों की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं और लाखों रुपये की वसूली की जाती है। इस समस्या को देखते हुए जल बोर्ड अब एक निर्धारित शुल्क के भुगतान के बाद डोमेस्टिक बोरवेल के लिए परमिशन जारी करेगा, जिससे नागरिकों को किसी भी तरह की हर्जाने या वसूली का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यह भी पढ़ें : US-Pak Relations: ईरान-अमेरिका के बीच ‘डाकघर’ बना पाक
पूर्व सरकार पर जमकर हमला, कहा- केजरीवाल ने डुबाया था बोर्ड
जल मंत्री ने सदन में अपने वक्तव्य के दौरान पूर्व केजरीवाल सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड को 70 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डुबाकर छोड़ दिया था, जिसे अब मौजूदा सरकार पटरी पर ला रही है। उन्होंने कहा, “अरविंद केजरीवाल ने जल बोर्ड की स्थिति को खराब कर दिया था। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी कमीशन खाने के चक्कर में काम लटकाए रखा गया।”
बुनियादी ढांचे को लेकर दी जानकारी
अपने भाषण में प्रवेश वर्मा ने बताया कि पिछले एक साल में बीजेपी सरकार ने पानी की 180 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई है और 110 किलोमीटर का काम प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 60 लाख घर हैं, लेकिन सिर्फ 30 लाख घरों के ही जल बोर्ड से कनेक्शन हैं। सरकार का लक्ष्य है कि पाइपलाइन के माध्यम से हर घर में पानी पहुंचाया जाए। उन्होंने दावा किया कि नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का काम एक साल में पूरा हो जाएगा, जिसके बाद दिल्ली में पानी की समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
कैग रिपोर्ट को भेजा समिति को
जल मंत्री ने ‘टैंकर माफिया’ पर भी निशाना साधा और पूर्व सरकार पर इससे वसूली का आरोप लगाया। चर्चा के दौरान विधायक अजय महावर, संजय गोयल, शिखा राय और तरविंदर सिंह मारवाह ने भी अपने विचार रखे। सदन में चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने जल बोर्ड की कैग रिपोर्ट को जांच के लिए विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति (COPU) को भेजने का निर्देश दिया।





















