Delhi news: दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने तिहाड़ और रोहिणी जेल में चल रहे एक अपराधी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो जेल के अंदर से संगठित रूप से उगाही कर रहा था। इस गिरोह में जेल अधिकारियों, कैदियों, वकीलों और निजी व्यक्तियों का गठजोड़ सामने आया है, जो जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के परिवार वालों से रिश्वत की मांग कर रहा था। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और जांच अभी भी जारी है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
शिकायत और जांच प्रक्रिया
बता दें कि यह पूरा मामला 9 फरवरी, 2026 को मिली एक शिकायत के बाद प्रकाश में आया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके पिता और भाई, जो रोहिणी जेल में बंद हैं। सुरक्षा और आराम के नाम पर उससे पैसे मांगे जा रहे हैं। शिकायत के आधार पर, दिल्ली की एंटी-करप्शन ब्रांच ने एक जाल बिछाया और एफआईआर नंबर 04/2026 दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक कार्रवाई में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें तीन जेल वार्डर, तिहाड़ जेल के एक हेड वार्डर, एक वकील और एक निजी व्यक्ति शामिल थे।
जांच के दौरान, आरोपियों की पहचान और संलिप्तता की पुष्टि के लिए बैंक खातों, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस, मोबाइल डेटा और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया गया। आरोपियों से लगभग एक लाख रुपये की रिश्वत की रकम भी बरामद की गई। गिरफ्तार आरोपियों में रोहिणी जेल के असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, बागपत के वकील हरेंद्र बंसल, दिल्ली के निजी व्यक्ति विप्लव खारी, और अन्य शामिल हैं। इनके अलावा, जेल के अन्य अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की भी संलिप्तता की जांच की जा रही है।
सिंडिकेट का गिरोह और उसकी गतिविधियां
खोज में पता चला है कि यह गिरोह विचाराधीन कैदियों के परिवार वालों से पैसे वसूलने के लिए एक व्यापक साजिश का हिस्सा था। गिरोह के सदस्य जेल के अंदर कैदियों को VIP ट्रीटमेंट का वादा करते थे, जिसमें सुरक्षा, विशेष सुविधाएं और तरजीही व्यवहार शामिल था। इसके बदले में वे परिवार वालों से रिश्वत की मांग करते थे। आरोपी गिरोह पैसे के लेनदेन को डिजिटल माध्यमों से ट्रैक करता था ताकि पकड़े जाने से बच सके। बैंक खातों में अवैध रूप से भेजे गए पैसे बाद में नकदी में बदल कर सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बांटे जाते थे।
अब तक की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि यह गिरोह जेल के अंदर एक संगठित उगाही नेटवर्क चला रहा था। इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान, पूरे पैसे के लेनदेन और साजिश के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है। एसआईटी इस गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने और इसकी अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को भी ट्रेस कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार बाहरी नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसके कारण इसकी जांच और भी जटिल हो गई है।
आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
जैसे ही जांच में नई जानकारी सामने आ रही है, पुलिस ने कहा है कि जल्द ही और भी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही, जेल अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी यदि वे इस गिरोह में शामिल पाए गए। इस घोटाले में शामिल सभी आरोपियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त सजा दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन ने इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया है।
जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के परिवार वालों से रिश्वत मांगने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश होना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह घटना जेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करती है। दिल्ली सरकार ने कहा है कि वह इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाएगी और जेल सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी। इससे जेल में बंद कैदियों और उनके परिवारों का भरोसा बढ़ेगा और जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम बढ़ेंगे।























