Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आग से होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए रिहायशी इमारतों में संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच के लिए ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ का निर्णय लिया है। दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने इसके लिए योग्य एजेंसियों, फर्मों और संस्थानों से प्रस्ताव मांगते हुए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी कर दिया है।
क्या है योजना?
जारी किए गए दस्तावेज के अनुसार, दिल्ली के उन सभी रिहायशी क्षेत्रों का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा, जहां अवैध या असुरक्षित तरीके से कमर्शियल प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आग की घटनाओं को रोकना और फायर सेफ्टी मानकों को मजबूत करना है। विभाग योग्य फायर ऑडिटर्स, फायर ऑफिसर्स या संबंधित अनुभव रखने वाली संस्थाओं को तैनात करेगा, जो तकनीकी मानकों के आधार पर इन इमारतों का ऑडिट करेंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दिल्ली फायर सर्विस के डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 10 लाख से अधिक ऐसी इमारतें हैं, जो मूल रूप से रिहायशी हैं लेकिन वहां व्यावसायिक काम हो रहे हैं। विभाग के पास इतनी बड़ी संख्या में इमारतों का निरीक्षण करने के लिए बुनियादी संसाधन और स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने मौजूदा स्टाफ को निरीक्षण के काम में लगा देंगे, तो आग लगने की स्थिति में मौके पर समय पर पहुंचने और आग बुझाने में परेशानी होगी, जिससे बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
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कर्मचारियों की भारी कमी
मास्टर प्लान 2021 के अनुसार दिल्ली फायर सर्विस में लगभग 45,000 कर्मचारियों का होना अनिवार्य है, जबकि वर्तमान में केवल 3,000 पद स्वीकृत हैं। इनमें से भी केवल 2,600 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। छुट्टियों और अन्य कारणों से प्रतिदिन सिर्फ 1,000 से 1,300 कर्मचारी ही ड्यूटी पर उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में थर्ड पार्टी ऑडिट ही एकमात्र विकल्प बचता है।
पीछे का असली कारण: पालम आग त्रासदी
इस कदम के पीछे हाल ही में हुए एक बड़े हादसे की छाया है। 18 मार्च को पालम के शाद नगर इलाके में एक इमारत की नीचली मंजिल पर बनी दुकान में लगी आग ने एक परिवार को खोखला कर दिया था। इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस त्रासदी के बाद दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ आपात बैठक की थी और सभी आवासीय व व्यावसायिक इमारतों के सख्त ऑडिट के निर्देश दिए थे।





















