Delhi News: दिल्ली में औद्योगिक इलाकों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला दक्षिण दिल्ली के चंदन होला इलाके का है, जहां रविवार की तड़के सुबह एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग की तीव्रता इतनी भयंकर थी कि दिल्ली फायर सर्विस को इसे तत्काल ‘मेक-4’ से लेकर ‘मेक-6’ तक का दर्जा देना पड़ा। हालांकि, इस विनाशकारी आग के बीच राहत की एकमात्र बात यह रही कि इस घटना में अब तक किसी भी तरह की जनहानि या घायल होने की सूचना सामने नहीं आई है।
आग कैसे शुरू हुई और तेजी से कैसे फैली?
पूरे मामले की जानकारी दें तो दक्षिण दिल्ली के चंदन होला इलाके में पंजाब नेशनल बैंक की बिल्डिंग के पास स्थित इस फैक्ट्री में रविवार को अचानक आग की लपटें उठनी शुरू हो गईं। दिल्ली फायर सर्विस को इस आग की पहली सूचना तड़के करीब 2 बजकर 11 मिनट पर प्राप्त हुई।
सूचना मिलते ही फायर डिपार्टमेंट ने तत्परता दिखाते हुए शुरुआत में 2 वॉटर टेंडर और 2 वॉटर बाउजर को घटनास्थल के लिए रवाना किया। जब दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे, तो आग ने काफी विकराल रूप ले लिया था। फैक्ट्री के अंदर मौजूद कच्चा माल और रसायनिक पदार्थों के कारण आग ने तेजी से पकड़ ली और कुछ ही पलों में पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।
मेक-4 से मेक-6 तक का सफर, बढ़ती गंभीरता
शुरुआती दमकल गाड़ियों को देखकर लग रहा था कि आग पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए। आग की लपटें इतनी ऊंची उठने लगीं कि आसपास की इमारतों को भी खतरा महसूस होने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रात 2 बजकर 40 मिनट पर फायर डिपार्टमेंट ने इसे ‘मेक-4’ घोषित कर दिया और मौके पर और अतिरिक्त दमकल गाड़ियां बुलाई गईं।
लेकिन आग पर कोई असर नहीं हो रहा था। आग की तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही थी। आखिरकार, तड़के 3 बजकर 8 मिनट पर अधिकारियों को यह कठिन निर्णय लेना पड़ा कि इसे दिल्ली फायर सर्विस के सर्वोच्च स्तर ‘मेक-6’ में अपग्रेड कर दिया जाए। ‘मेक-6’ का मतलब होता है कि आग बेहद भयंकर और नियंत्रण से बाहर है, जिसके लिए भारी मात्रा में संसाधनों की जरूरत पड़ती है।
15 दमकल गाड़ियों का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
‘मेक-6’ घोषित होते ही दिल्ली फायर सर्विस ने एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने का फैसला किया। मौके पर कुल 15 दमकल वाहनों को तैनात किया गया। इन 15 वाहनों में 6 वॉटर टेंडर, 7 वॉटर बाउजर के अलावा 1 ब्रेकडाउन फायर टेंडर (BFT) और 1 मोबाइल प्लेटफॉर्म (MP) शामिल थे। मोबाइल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल ऊंचाई से पानी छिड़कने और बचाव कार्य के लिए किया जाता है, जो इस ऑपरेशन में काफी कारगर साबित हुआ।
इतनी बड़ी आग को बुझाने के लिए स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को भी मैदान में उतरना पड़ा। दमकल विभाग के डिविजनल ऑफिसर आर. अटवाल ने पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली। उनके साथ एडीओ (ADO) संतोष, एडीओ सरबजीत, स्टेशन ऑफिसर मनीष और स्टेशन ऑफिसर अमित सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
इन अधिकारियों के निर्देशन में दमकल कर्मियों ने एक रणनीतिक तरीका अपनाया। उन्होंने पहले प्राथमिकता दी कि आग को आसपास की अन्य इमारतों और बैंक बिल्डिंग तक फैलने से किसी भी कीमत पर रोका जाए। इसके लिए दमकल कर्मियों ने आसपास की दीवारों पर लगातार पानी की बौछार करके एक प्रकार का ‘कूलिंग जोन’ बनाया, ताकि तपती हुई दीवारों के कारण आग पास की बिल्डिंग में न उठ सके।
कैसे बची जानें की भेंट?
‘मेक-6’ श्रेणी की आग में आमतौर पर भारी जानमाल का नुकसान होता है, लेकिन इस मामले में जनहानि न होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसके पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पहला, यह घटना रविवार की तड़के सुबह की है, जब फैक्ट्री में कामगारों की संख्या शायद ही कोई हो। दूसरा, दमकल विभाग ने सूचना मिलते ही त्वरितता से काम किया और आग को फैलने से पहले ही इलाके को खाली करवा लिया होगा।
फिलहाल आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है, हालांकि दमकल विभाग के कर्मी अभी भी मौके पर मौजूद हैं और ‘कूलिंग ऑपरेशन’ चला रहे हैं, ताकि अंदर कोई छुपी हुई लपटें दोबारा उभरकर आग न लगा दें। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस फैक्ट्री में आग कैसे लगी? क्या यह शॉर्ट सर्किट है, या फिर फैक्ट्री में रखे गए किसी आतिशबाजी या इंधन सामग्री की वजह से यह हादसा हुआ है? फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है।






















