Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर इन दिनों छात्रों और युवाओं का गुस्सा सड़कों पर उतरकर दिख रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चल रहे इस धरने-प्रदर्शन का मकसद भारतीय शिक्षा व्यवस्था में गहरे जड़ें जमा चुकी बुनियादी खामियों को उजागर करना है। इस छात्र आंदोलन को देश के दो बड़े और प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ताओं—योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। दोनों ही नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्र शक्ति को संबोधित किया और केंद्र सरकार, खासकर शिक्षा मंत्रालय की कड़ी आलोचना की।
शिक्षा व्यवस्था के लिए लड़ रहे हैं युवा
इस आंदोलन की कोर मांगों में परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, बार-बार हो रहे पेपर लीक पर अंकुश लगाना, पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को गंभीरता से लेना और सबसे महत्वपूर्ण—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है। छात्रों का मानना है कि लगातार हो रहे अनियमितताओं और पेपर लीक से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और सरकार इस ओर आंखें मूंदे हुए है।
जानी-मानी आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने छात्रों की इस लड़ाई को देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक अपराधियों में कानून का सच्चा डर नहीं बैठेगा, तब तक परीक्षा भवनों से लेकर तय किए गए चक्रव्यूह तक पेपर लीक होते रहेंगे।
अंजलि भारद्वाज ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 2002 से लेकर 2026 तक के दौरान भारत में करीब 45 बड़े परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। लेकिन इन 45 मामलों में से केवल दो ही ऐसे मामले हैं, जिनमें दोषियों को सजा मिल पाई है। यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि हमारी व्यवस्था में कितनी बड़ी कमी है। उन्होंने कहा कि सरकार से नैतिक जवाबदेही की उम्मीद करना अब व्यर्थ होता जा रहा है, क्योंकि सरकार न तो समस्या को स्वीकार कर रही है और न ही कोई स्थायी समाधान दे रही है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर जताई एकजुटता
अंजलि भारद्वाज ने वहां मौजूद युवाओं से कहा कि यह बेहद शर्मनाक बात है कि लद्दाख के प्रख्यात शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक और 25 अन्य छात्रों को बुनियादी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि करदाता और युवा लोकतंत्र में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है।
योगेंद्र यादव ने कहा—’लोकतंत्र की जगह हो रही सिकुड़ी’
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक विचारक योगेंद्र यादव ने इस आंदोलन को एक ‘जन आंदोलन’ करार दिया। उन्होंने बताया कि वह जानबूझकर इस प्रदर्शन में कुछ देरी से शामिल हुए, ताकि इसे किसी एक विशेष राजनीतिक दल या नेता का आंदोलन न कहा जाए। उन्होंने CJP की तारीफ करते हुए कहा कि इसने विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाकर जनता की भागीदारी को केंद्र में रखा है।
योगेंद्र यादव ने जंतर-मंतर के बदलते नज़ारे को लोकतंत्र के कमजोर होने का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “करीब 15 साल पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ जब हम यहां आए थे, तब जंतर-मंतर खुला था। लेकिन आज यहां हर तरफ बैरिकेड्स लगे हैं।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जंतर-मंतर का भौतिक रूप से सिकुड़ना महज एक जगह का बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ने की लाइव तस्वीर है। उन्होंने कहा कि आज देश में विरोध की जगह खत्म होती जा रही है, दिन में जगह मिलती है तो शाम तक पुलिस घर पर पहुंच जाती है।
सोनम वांगचुक की सेहत पर बढ़ता खतरा
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत है। बुधवार शाम को जारी किए गए मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल और दिल्ली की भयंकर गर्मी ने उनके शरीर को कमजोर कर दिया है।
मेडिकल रिपोर्ट में उनका ब्लड प्रेशर 110/70 और हार्ट रेट 77 प्रति मिनट बताया गया है। हालांकि, सबसे ज्यादा चिंता उनके गिरते ब्लड शुगर लेवल को लेकर है। जहां सामान्य ब्लड शुगर लेवल 100 से ऊपर होना चाहिए, वहीं वांगचुक का ब्लड शुगर पहले 64 और फिर घटकर 61 तक पहुंच गया है। पिछले महज तीन दिनों में उनका वजन 2.4 किलोग्राम तक कम हो चुका है। हालांकि, उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन 96 प्रतिशत बना हुआ है, लेकिन उमस भरी गर्मी में उनकी सेहत बेहद नाजुक स्थिति में है।
आंदोलनकारियों ने दी सरकार को चेतावनी
योगेंद्र यादव ने इस कठिन परिस्थिति में भी छात्रों के हौसले की तारीफ की। वहीं, धरने पर बैठे छात्रों का कहना साफ है कि जब तक केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कड़े और प्रभावी कानून नहीं बनाती और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का रास्ता नहीं निकालती, तब तक यह आंदोलन और तेजी से फैलेगा। अब देखना होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव और युवाओं के गुस्से के सामने कब झुकती है और क्या कोई ठोस रास्ता निकालती है।






















