Delhi News: दिल्ली में यमुना नदी के बाढ़ नियंत्रण क्षेत्र में अवैध कब्जों को हटाने के लिए आज गुरुवार सुबह एक बड़ा अभियान चलाया गया। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने यमुना विहार स्थित निगमबोध घाट के पास यमुना बाजार में बुलडोजर चलाकर 300 से अधिक कच्चे और पक्के मकानों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत की गई है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
सुबह 6:30 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन, भारी सुरक्षा बल तैनात
प्रशासन द्वारा यह बुलडोजर कार्रवाई आज सुबह करीब 6:30 बजे शुरू की गई। ताकि कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए मौके पर भारी संख्या में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। कार्रवाई शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही यमुना बाजार के आसपास के सभी रास्तों की बेरीकैडिंग कर दी गई और आम नागरिकों या मीडिया के आवागमन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया।
मौके पर 5 भारी बुलडोजर मशीनों को लाया गया, जिन्होंने एक-एक करके इन अवैध निर्माणों को धराशायी करना शुरू किया। इस दौरान इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि पुलिस बल की मौजूदगी के चलते कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।
क्यों चला बुलडोजर? सुप्रीम कोर्ट और डीडीए के आदेश
यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। इसके पीछे एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है। डीडीए ने दो जून को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत यहां रहने वाले लोगों को 23 जून तक अपने घर खाली करने का नोटिस जारी किया था। इसके बाद एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर 24 जून से कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई थी।
इसके अलावा, 13 मई को ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम’ के तहत भी यमुना बाजार को खाली कराने का नोटिस भेजा जा चुका था। प्रशासन ने लोगों को समय-समय पर चेतावनी दी, लेकिन जब लोगों ने मकान नहीं खाली किए, तब बुधवार रात तक का समय देने के बाद गुरुवार सुबह अमलीयता दिखाई गई।
निवासियों का दर्द: कोर्ट गए, लेकिन नहीं मिली राहत
हालांकि, प्रशासन के इस तर्क के बीच जिन लोगों के घर ध्वस्त हुए हैं, उनकी कहानी कुछ और ही है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस इलाके में करीब 310 से अधिक घर थे और यहां कई पीढ़ियां बसी हुई थीं। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
बुलडोजर चलने से पहले लोगों ने अपने घरों से जरूरी सामान निकालने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में मिट्टी का ढेर बनकर रह गया, जो उनकी कई पीढ़ियों की यादों को बुझा रहा था। महिलाओं और बच्चों में भारी दहशत और गुस्सा देखा गया। लोगों का सवाल है कि जब उन्हें यहां से हटाया जा रहा है, तो प्रशासन उनके पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं कर रहा है।





















