Delhi News: देशभर में चल रहे शिक्षा व्यवस्था के संकट, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और तनावग्रस्त होकर छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मुद्दे ने एक बार फिर दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध का केंद्र बना दिया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में चल रहा यह धरना दूसरे दिन भी उसी तेवर और जोश के साथ जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह आंदोलन नहीं थमेगा।
हालांकि, निर्धारित समय सीमा खत्म होने के बाद दिल्ली पुलिस का रुख कड़ा हो गया है। पुलिस ने धरने को अवैध घोषित करते हुए प्रदर्शनकारियों को स्थल खाली करने की लगातार चेतावनी दी, लेकिन आंदोलनकारियों के हौसले कम नजर नहीं आ रहे हैं।
पुलिस की ‘अवैध’ घोषणा और अभिजीत दीपके का करारा जवाब
धरना स्थल पर दिल्ली पुलिस द्वारा लाउडस्पीकर के जरिए बार-बार यह घोषणा की गई कि प्रदर्शन की अनुमति का समय समाप्त हो चुका है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अब यह धरना गैरकानूनी माना जाएगा और कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस की इस घोषणा का करारा जवाब देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सवाल खड़े किए और उन्होंने पूछा कि अगर हमारा शांतिपूर्ण धरना गैरकानूनी है, तो उन तमाम बच्चों की मौतों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली की कमियों और तनाव के चलते आत्महत्या कर ली?” अभिजीत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किस नियम के तहत एक मंत्री बच्चों की मौतों और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवालों के बावजूद अपनी कुर्सी पर बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। इसके लिए बार-बार अनुमति की शर्त लगाना और समय-सीमा तय करना लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने जैसा है।
यह लड़ाई संविधान और छात्रों के भविष्य की है
अभिजीत दीपके ने इस आंदोलन को केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन के दायरे से निकालकर एक बड़े सामाजिक और संवैधानिक संघर्ष के रूप में पेश किया। उन्होंने मौजूद पुलिसकर्मियों से सीधी अपील करते हुए कहा कि आप इसे एक पार्टी के प्रदर्शन के तौर पर मत देखिए। यह उन लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है, जिनकी जिंदगी पेपर लीक और गलत शिक्षा नीतियों के कारण बर्बाद हो रही है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि कई पुलिसकर्मी निजी तौर पर इस बात को समझते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि पुलिस की शपथ किसी विशेष राजनीतिक दल या मंत्री की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि संविधान और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए होती है। अपने परिवार का पुलिस सेवा से जुड़ा होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे पुलिस के दबावों को समझते हैं, लेकिन ऐसे समय में संवैधानिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।
रात के अंधेरे में कटी सुविधाएं
आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रशासन कथित तौर पर कड़े कदम उठा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शनिवार देर रात प्रशासन ने एकाएक जंतर-मंतर पर पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति बंद कर दी। अभिजीत दीपके ने बताया कि सुबह से धरना स्थल पर बैठे लोगों को शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरतों तक से वंचित किया गया।
उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हमारी मांगें गलत हैं, तो सरकार को खुलकर बहस करनी चाहिए और हमें जवाब देना चाहिए। पानी और बिजली बंद करके दबाव बनाने की कोशिश करना लोकतांत्रिक मूल्यों की खुली तिरस्कार है।”
राष्ट्रगान के साथ हुई आंदोलन की शुरुआत
दूसरे दिन का धरना बेहद व्यवस्थित तरीके से शुरू हुआ। सुबह जैसे ही समर्थक जंतर-मंतर पर जुटने लगे, सबसे पहले राष्ट्रगान गाया गया। इसके बाद आयोजकों ने आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की। आयोजकों का कहना है कि यह महज एक धरना नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जहां तमाम छात्र और अभ्यर्थी अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से भी छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। धरना स्थल पर दिनभर विभिन्न वक्ता शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा कर रहे हैं।






















