Delhi News: भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ ने अपने कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और विभागीय नीतियों के संदर्भ में अपनी चिंताओं को सार्वजनिक करते हुए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। यह निर्णय संगठन के महासचिव अनंत कुमार पाल ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में लिया, जिसमें उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में संगठन की ओर से चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल जैसी रणनीतियों का प्रयोग किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य सरकार और विभागीय अधिकारियों तक अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है ताकि डाक विभाग की सेवाओं में सुधार हो सके और कर्मचारियों के हितों का संरक्षण हो सके।
आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम
अनंत कुमार पाल ने बताया कि इस आंदोलन की शुरुआत 20 जुलाई से एक चरणबद्ध संघर्ष के रूप में की जाएगी, जिसमें कर्मचारी अपने समर्थन में काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। यह कदम कर्मचारियों में मौजूद असंतोष और विभागीय सुधारों के प्रति नाराजगी को दर्शाने के लिए उठाया गया है। इसके अतिरिक्त, 28 जुलाई को मंडलीय कार्यालयों के सामने प्रदर्शन करने का भी आह्वान किया गया है, ताकि सरकार और विभागीय अधिकारियों को अपनी बात पहुंचाई जा सके। साथ ही, 5 अगस्त को एक दिवसीय हड़ताल का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें कर्मचारी अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर सामूहिक रूप से काम बंद करेंगे। यदि इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम नहीं निकला और सरकार एवं विभागीय अधिकारी मांगों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो संगठन ने 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है।
प्रमुख माँगें और मुद्दे
डाक कर्मचारियों की मुख्य मांगों में विभागीय कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने, कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और डाक सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई आवश्यक कदम शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से कार्य से जुड़े लक्ष्यों की समीक्षा, रेल डाक सेवा की व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार, रिक्त पदों का शीघ्र भरना, मेल मोटर सेवा एवं सिविल विंग के पदों का संरक्षण, संवर्गों का प्रस्तावित विलय पर कर्मचारियों से व्यापक परामर्श, पूर्व सैनिक कर्मचारियों के वेतन एवं नियुक्ति संबंधित मामलों का समाधान तथा मृतक आश्रितों को शीघ्र नियुक्ति शामिल हैं।
विभागीय सुधार और कर्मचारियों में चिंता
महासंघ के महासचिव अनंत कुमार पाल ने अपने वक्तव्य में बताया कि विभाग में लागू की जा रही सुधारात्मक प्रक्रियाओं और परामर्शदाता संस्थाओं की सिफारिशों को लेकर कर्मचारियों में आशंकाएँ हैं। उनका मानना है कि इन सुधारों के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार और दबाव बढ़ रहा है, जो विभाग की कार्यप्रणाली और सेवाओं की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से बचत योजनाओं, लक्ष्यों और डाक सेवाओं के संचालन को लेकर कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
संरचनात्मक परिवर्तनों पर चिंता
प्रेस वार्ता में भारतीय पोस्टल इम्प्लॉइज एसोसिएशन (पोस्टमैन एवं एमटीएस) के महासचिव ख्याली राम शर्मा, भारतीय रेलवे मेल सेवा क्लास-III (बीआरएमएस-III) के महासचिव राजेश कुमार और भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ (बीजीडीकेएस) के महासचिव दिनेश कुमार राय ने भी भाग लिया। इन नेताओं ने कहा कि मेल मोटर सेवा और सिविल विंग से संबंधित संरचनात्मक परिवर्तनों तथा विभिन्न संवर्गों के प्रस्तावित विलय को लेकर कर्मचारियों में चिंता व्याप्त है। वे चाहते हैं कि इन मुद्दों पर कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हुए व्यापक और पारदर्शी संवाद किया जाए।
संगठन की रणनीति और मांगें
महासंघ के महासचिव अनंत कुमार पाल ने बताया कि अपनी मांगों के समर्थन में संगठन 20 से 27 जुलाई तक कर्मचारियों द्वारा काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेगा। इसके बाद, 28 जुलाई को मंडलीय कार्यालयों के सामने प्रदर्शन और 5 अगस्त को एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया जाएगा। यदि सरकार और विभागीय अधिकारी इन मांगों को मानने के लिए सकारात्मक कदम नहीं उठाते हैं, तो संगठन 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का भी विचार कर रहा है।
संगठन का उद्देश्य
डाक कर्मचारी महासंघ का मुख्य उद्देश्य न केवल कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना है बल्कि देश की सार्वजनिक डाक सेवाओं को और अधिक प्रभावी, सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाना है। संगठन का मानना है कि बेहतर कार्यशैली, कर्मचारियों का हित संरक्षण और विभागीय सुधारों के माध्यम से ही डाक सेवाओं को जनता तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सकता है। महासंघ का यह भी मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान और विभाग में पारदर्शिता और संवाद को बढ़ावा देना विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।





















