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पाकिस्तान की फायरिंग से मृतकों की संख्या 55 पहुंची

9 जून से शुरू हुए इस प्रदर्शन में अब तक 55 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य पीओके में पाकिस्तान के हस्तक्षेप को खत्म करना और वहां की जनता की आजादी का संघर्ष है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित हैं।

पाकिस्तान-भारत सीमा तनाव बढ़ाने वाली घटनाएँ

HIGHLIGHTS

  • 9 जून से जारी प्रदर्शन में मृतकों की संख्या बढ़ी
  • पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में संघर्ष तेज
  • 12 कथित शरणार्थी सीटें खत्म करने की मांग तेज
  • अवामी एक्शन कमेटी को आतंकवादी घोषित किया गया
  • नेताओं पर 1 करोड़ का इनाम, देशद्रोह का आरोप

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में फिर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फायरिंग की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान सेना और रेंजर्स की गोलीबारी में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है। यह घटना रावलकोट के ईदगाह मैदान के पास हुई, जहां प्रदर्शनकारी लगातार 9 जून से जारी अपने प्रदर्शन को जारी रखे हुए हैं। इस प्रदर्शन में अब तक कुल 38 मुख्य मांगों के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर हैं, लेकिन पाकिस्तान की सेना और सरकार इन मांगों को मानने से इनकार कर रही है।

फायरिंग का घटनाक्रम

प्रदर्शनकारियों पर पहली बार सुबह लगभग 4 बजे गोलीबारी की गई, जब वे ईदगाह मैदान के पास नमाज़ पढ़ने के लिए इकट्ठा हुए थे। इस फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और वे मैदान की तरफ भाग गए। इसके बाद, दोबारा सुबह 7 बजे पाकिस्तान सेना और रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर रबर बुलेट और AK-47 से फायर किया। इस गोलीबारी में मीरपुर से आए एक प्रदर्शनकारी और रावलकोट के ही रहने वाले एक अन्य प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। इस दौरान कई वीडियो और फोटोज भी सामने आए हैं, जिनमें गोली के खोखे, खून के निशान और भागते हुए प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट देखा जा सकता है।

प्रदर्शन की गंभीरता और मृतक संख्या

9 जून से शुरू हुए इस प्रदर्शन में अब तक 55 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य पीओके में पाकिस्तान के हस्तक्षेप को खत्म करना और वहां की जनता की आजादी का संघर्ष है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित हैं पहली, पीओके के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा ली जाने वाली पाकिस्तान से वफादारी की शपथ को बदलकर जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक एकता और अखंडता के प्रति वफादार बनाने की मांग। दूसरी, पीओके में 12 कथित शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की मांग, जिनके जरिए पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसियां पीओके में अपनी कठपुतली सरकार बनाती हैं।

मुख्य मांगें और उनका मकसद

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीओके के सांसद, प्रधानमंत्री और मंत्रियों द्वारा ली जाने वाली शपथ में बदलाव कर उन्हें जम्मू-कश्मीर की आजादी के लिए वफादार किया जाए। वर्तमान शपथ में पाकिस्तान और पीओके के विलय का समर्थन किया जाता है, जो भारत के साथ विवाद का कारण है। वहीं, 12 कथित शरणार्थी सीटें पाकिस्तान की सरकार और आईएसआई के प्रभाव को मजबूत करती हैं, जिनके जरिए वे पीओके में अपनी कठपुतली सरकार चलाते हैं। प्रदर्शनकारी इन मांगों को लेकर पाकिस्तान की सरकार और सेना के साथ टकराव पर हैं, क्योंकि ये दोनों पक्ष इन मांगों को पीओके के पाकिस्तान में विलय के कदम के रूप में देखते हैं।

आतंकवाद और नेताओं पर इनाम

पाकिस्तान सरकार ने अवामी एक्शन कमेटी को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इस संगठन के चार प्रमुख नेताओं—शौकत नवाज़ मीर, सरदार उमर नज़ीर, ख़्वाजा मेहरान और सरदार अमन ख़ान—पर देशद्रोह और दंगा का मामला दर्ज किया गया है। इन नेताओं पर पाकिस्तान सरकार ने एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम भी रखा है। इन नेताओं का आरोप है कि वे पीओके में पाकिस्तान के हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यह प्रदर्शन और फायरिंग की घटनाएं पाकिस्तान-भारत सीमा के तनाव को बढ़ा रही हैं। भारत ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है और कहा है कि पाकिस्तान को अपनी नापाक नीति छोड़नी चाहिए। पाकिस्तान की सरकार और सेना इन प्रदर्शनों को दबाने की कोशिशों में लगी हैं, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी आजादी और स्वायत्तता की लड़ाई जारी रखे हुए हैं। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है, जो क्षेत्र में स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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