कूलर बना जानलेवा! तेलंगाना में करंट लगने से शख्स की मौत, जानें कौन सी गलती उजाड़ रही जिंदगियां

Cooler Deadly: घर पर कूलर की मरम्मत कर रहा था, तभी अचानक तेज करंट का झटका लगने से वह वहीं गिर पड़ा। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देश में गर्मियों के मौसम में ऐसे हादसों की बाढ़ सी आ जाती है, जहां पानी और बिजली का खतरनाक मेल जानलेवा साबित होता है। लेकिन आखिर एक साधारण सा कूलर इतना खतरनाक कैसे बन जाता है?

कूलर की मरम्मत करते समय करंट लगने से युवक की मौत (फाइल फोटो)

HIGHLIGHTS

  • कूलर को छूते ही क्यों उड़ गई जान? तेलंगाना हादसे ने खोले नए राज
  • तेलंगाना हादसे के बाद चल रही जागरूकता, आप भी जान लें बचाव के तरीके
  • तुरंत उठाएं ये कदम, वरना हो सकती है मौत (तेलंगाना हादसे से सबक)
  • पानी और बिजली का खतरनाक मिश्रण बना मौत का कारण, नजरअंदाज न करें ये चेतावनी
  • तेलंगाना में कूलर से करंट लगने से मौत, जांचें क्या आपका कूलर भी सुरक्षित है?

Cooler: तेज धूप और लू के बीच कूलर हमारे लिए संजीवनी बन जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि थोड़ी सी लापरवाही इसे मौत का सबब बना सकती है? तेलंगाना से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सुरक्षा की अनदेखी की कीमत समझाई है।

तेलंगाना के हाजीपुर में हुआ हृदयविदारक हादसा

तेलंगाना के हाजीपुर में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी की चेतावनी बुलंद कर दी है। एक व्यक्ति अपने घर पर कूलर की मरम्मत कर रहा था, तभी अचानक तेज करंट का झटका लगने से वह वहीं गिर पड़ा। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देश में गर्मियों के मौसम में ऐसे हादसों की बाढ़ सी आ जाती है, जहां पानी और बिजली का खतरनाक मेल जानलेवा साबित होता है। लेकिन आखिर एक साधारण सा कूलर इतना खतरनाक कैसे बन जाता है?

कूलर को जानलेवा बनाने वाली 4 बड़ी वजहें

कूलर एक ऐसी मशीन है जहां बिजली और पानी एक साथ काम करते हैं। जब तक सब कुछ सही है, यह सुरक्षित है, लेकिन थोड़ी सी गड़बड़ी भारी पड़ सकती है:

1. अर्थिंग की कमी (सबसे बड़ा कारण):

किसी भी इलेक्ट्रिक उपकरण में अर्थिंग सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। अगर करंट लीक होता है, तो वह अर्थिंग के जरिए जमीन में चला जाता है। लेकिन अगर अर्थिंग खराब है, तो करंट कूलर की मेटल बॉडी में फैल जाता है। ऐसे में कूलर को छूने वाला इंसान खुद करंट का रास्ता बन जाता है।

2. घिसी हुई वायरिंग:

समय के साथ कूलर के अंदर के तार घिस जाते हैं या इंसुलेशन कमजोर हो जाता है। ऐसे में बिजली सीधे मेटल बॉडी तक पहुंच जाती है। यह समस्या पुराने कूलरों में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।

3. मोटर में पानी का रिसाव:

कूलर की मोटर लगातार पानी के संपर्क में रहती है। अगर पानी मोटर या तारों तक पहुंच जाता है, तो शॉर्ट सर्किट हो सकता है और पूरा कूलर करंट से भर सकता है।

4. गीले हाथ और गीला फर्श:

कूलर में पानी भरते समय या साफ करते समय अगर हाथ गीले हों या फर्श पर पानी हो, तो करंट शरीर में और तेजी से फैलता है। इससे दिल की धड़कन अचानक रुक सकती है और कुछ ही सेकंड में मौत हो सकती है।

हादसे से पहले मिलते हैं ये संकेत

हादसा कभी अचानक नहीं होता, उससे पहले कूलर आपको चेतावनी देता है।

  • कूलर को छूने पर हल्का झटका लगना।
  • बॉडी में हल्की सी करंट (चुभन) महसूस होना।

लेकिन अधिकतर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं और यही लापरवाही बड़े हादसे का रूप ले लेती है।

सुरक्षित रहने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां

गर्मी में ठंडक जरूरी है, लेकिन जान सबसे जरूरी है। इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  • सही अर्थिंग: कूलर को हमेशा तीन-पिन (अर्थिंग वाले) सॉकेट में ही लगाएं। घर की अर्थिंग खराब हो तो उसे तुरंत ठीक कराएं।
  • पानी भरते समय बिजली बंद रखें: कूलर में पानी भरने या उसे साफ करने से पहले हमेशा प्लग निकाल लें या स्विच बंद करें।
  • गीले हाथों से न छुएं: कभी भी गीले हाथों से कूलर का स्विच न चलाएं या उसे न छुएं।
  • रखें पुराने कूलर पर नजर: पुराने कूलरों (खासकर लोहे वाले) की वायरिंग और मोटर की हर महीने जांच कराएं।
  • दें चेतावनी पर ध्यान: अगर कभी भी कूलर छूने पर हल्की सी करंट लगे, तो उसे इस्तेमाल करना तुरंत बंद करें और बिजली का प्लग निकालकर इलेक्ट्रिशियन को बुलाएं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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