Delhi News: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक, अन्यायपूर्ण और संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ ‘सत्याग्रह’ आंदोलन शुरू किया।
जंतर-मंतर पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए बैनरों पर लिखा था, पहले वोट चोरी, अब सीट चोरी और फिर चुनाव आयोग की बेशर्म मनमानी। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए उनकी उम्मीदवार का नामांकन जानबूझकर खारिज किया गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को कथित तौर पर गलत और मनमाने आधार पर रद्द किया गया है। पार्टी का दावा है कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी की थीं, इसके बावजूद उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने सत्याग्रह के माध्यम से चुनाव आयोग के समक्ष अपनी सामूहिक आवाज उठाने का फैसला किया है।
लोकतंत्र के लिए खतरा बताया
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। उमंग सिंघार ने कहा कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को ऐसा फैसला देना चाहिए जो भविष्य के लिए मिसाल बने। यदि इस मामले में उचित फैसला नहीं आता है तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट है और वहां कानून के जानकार लोग मौजूद हैं। चुनाव आयोग बार-बार अदालत को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
कांग्रेस ने फैसले को बताया असंवैधानिक
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पंवार ने भी चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया जाना पूरी तरह गलत और असंवैधानिक है।
सुनील पंवार ने कहा कि हम सरकार और चुनाव आयोग दोनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव लड़ने से रोका। यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
हलफनामे में अनियमितताओं का हवाला
जानकारी के अनुसार, चुनाव अधिकारियों ने मीनाक्षी नटराजन के चुनावी हलफनामे में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया था। हालांकि कांग्रेस इस आधार को पूरी तरह निराधार बता रही है।
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है। इसी सप्ताह कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर इस मामले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी और निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की थी।
राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और भाजपा दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की “जुगलबंदी” के कारण राज्यसभा चुनाव का परिणाम मतदान से पहले ही तय कर दिया गया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वोट चोरी और सरकार चोरी के बाद भाजपा और चुनाव आयोग की जुगलबंदी ने सीट चोरी के जरिए मुकाबला शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे और उनके खिलाफ कोई मामला भी लंबित नहीं था। इसके बावजूद भाजपा की एक कथित रूप से बेबुनियाद आपत्ति के आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।
परिमल नथवानी का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी का भी उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि नथवानी ने अपने नामांकन फॉर्म में नाम संबंधी त्रुटियां की थीं और कुछ आवश्यक जानकारियां भी अधूरी थीं।
कांग्रेस नेता के अनुसार, चुनाव आयोग ने उन्हें अपनी गलतियां सुधारने का अवसर दिया, जबकि मीनाक्षी नटराजन को ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब राजनीतिक रूप से बड़ा विवाद बनता जा रहा है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में यह मामला अदालत और राजनीतिक मंचों पर और अधिक गर्मा सकता है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो देशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल, जंतर-मंतर पर हुआ सत्याग्रह इस मुद्दे को लेकर पार्टी की नाराजगी और चुनाव आयोग के खिलाफ उसके आक्रामक रुख का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।






















