संध्या समय न्यूज
शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ के ताजा संपादकीय लेख “कॉकरोच मरते नहीं” ने महाराष्ट्र और केंद्र की विदेश नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। लेख में पार्टी सांसद संजय राउत ने ईरान-इजरायल युद्ध के परिप्रेक्ष्य में अमेरिका और इजरायल की सैन्य रणनीतियों की कड़ी आलोचना की और भारत की चुप्पी पर तीखा तंज कसा। राउत ने लेख में कहा कि किसी देश की विचारधारा और अस्तित्व को केवल मिसाइलों और सैन्य हमलों से खत्म नहीं किया जा सकता। इसे उन्होंने ‘कॉकरोच’ रूपक के जरिए समझाया, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपना अस्तित्व बचा लेते हैं।
अमेरिका-इजरायल की रणनीति और ईरान का पलटवार
लेख में लिखा गया है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को यह भ्रम था कि वे ईरान को आसानी से दबा सकते हैं। अयातुल्ला खामेनेई और ईरानी सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाने के बावजूद ईरान द्वारा तेल अवीव और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमलों ने दिखाया कि युद्ध को दबाया नहीं जा सकता। राउत ने चीन के तिब्बत पर कब्जे का उदाहरण देते हुए यह भी बताया कि कैसे ताकतवर देश ‘आजादी’ के नाम पर दूसरे देशों की संप्रभुता कुचलते रहे हैं।
भारत की ‘मौन’ कूटनीति पर सवाल
लेख में सबसे विवादास्पद टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर है। राउत ने सवाल उठाया कि जब पूरी दुनिया युद्ध और वैश्विक संकटों से जूझ रही है, भारत एक ठोस मध्यस्थ की भूमिका निभाने में क्यों असफल रहा। उन्होंने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा, न कि घटा। शिवसेना (UBT) का दावा है कि भारत की कूटनीतिक चुप्पी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि पर असर डाल रही है।
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मानवता और वैश्विक शांति का संकट
लेख में गाजा और ईरान में हो रहे निर्दोष बच्चों और आम नागरिकों की मौतों पर चिंता जताई गई। राउत ने इसे मानवता के लिए गंभीर संकट बताया और चेताया कि ताकतवर देश अपने आर्थिक हितों की खातिर मासूमों की बलि नहीं चढ़ा सकते। लेख का निष्कर्ष स्पष्ट है: जो देश या विचारधारा दमन के खिलाफ लड़ना जानते हैं, वे किसी भी परिस्थिति में खत्म नहीं होते — ठीक वैसे ही जैसे ‘कॉकरोच’ विपरीत परिस्थितियों में भी अपना अस्तित्व बचाते हैं।
























